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Manoj Devdutt
KHud se tujhe hata raha hooñ main
KHud se tujhe hata raha hooñ main | ख़ुद से तुझे हटा रहा हूँ मैं
- Manoj Devdutt
ख़ुद
से
तुझे
हटा
रहा
हूँ
मैं
ख़ुद
को
बहुत
सता
रहा
हूँ
मैं
उसने
जगाया
रातों
को
मुझको
रातों
को
अब
जगा
रहा
हूँ
मैं
हक़
तू
नहीं
समझ
रही
तो
क्या
हक़
तुझपे
तो
जता
रहा
हूँ
मैं
इज़्ज़त
तेरी
बचानी
है
मुझको
हरक़त
तेरी
दबा
रहा
हूँ
मैं
मालूम
है
ग़लत
थी
तू
फिर
भी
सबको
ग़लत
बता
रहा
हूँ
मैं
बस
में
तुझे
बिठा
दिया
ज़िन्दा
लाश
ख़ुद
को
बना
रहा
हूँ
मैं
घर
पर
बहन
जवान
बैठी
है
बस
इसलिए
कमा
रहा
हूँ
मैं
ग़म
से
हुई
है
'देव'
की
यारी
हर
ग़म
पे
मुस्कुरा
रहा
हूँ
मैं
- Manoj Devdutt
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इक
उसने
मुझको
क्या
छोड़ा
है
फिर
मैं
बहुतों
को
छोड़
आया
हूँ
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अफ़सोस
उस
पर
क्या
करूँँगा
मैं
जो
हाथ
में
है
ही
नहीं
मेरे
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वो
जुदा
होकर
जुदा
होता
नहीं
है
आशिकों
का
फिर
ख़ुदा
होता
नहीं
है
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यूँँ
तो
सफ़र
में
आज
भी
सोता
नहीं
हूँ
मैं
वो
याद
तो
आती
है
पर
रोता
नहीं
हूँ
मैं
कितना
ज़ियादा
मैं
हुआ
उस
शख़्स
का
अपना
इतना
कभी
अपना
भी
तो
होता
नहीं
हूँ
मैं
अब
ज़िन्दगी
का
क़ीमती
वो
शख़्स
खोया
था
बस
फिर
किसी
को
भी
यहाँ
खोता
नहीं
हूँ
मैं
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Manoj Devdutt
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आग़ोश
में
तू
ले
मुझे
सब
दर्द
अपने
दे
मुझे
जब
तू
रहेगी
पास
तो
कुछ
लोग
समझेंगे
मुझे
जब
भी
मुसीबत
उसपे
हो
तो
आगे
बस
रक्खे
मुझे
चाहत
मेरी
भी
ये
रही
तू
भी
कभी
ढूँडे
मुझे
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Manoj Devdutt
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