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Manoj Devdutt
yahaañ nahin to ham milenge aasmaan men
yahaañ nahin to ham milenge aasmaan men | यहाँ नहीं तो हम मिलेंगे आसमान में
- Manoj Devdutt
यहाँ
नहीं
तो
हम
मिलेंगे
आसमान
में
सभी
तरह
के
गुल
खिलेंगे
आसमान
में
चिराग़
जो
बुझा
दिए
गए
ज़मीन
पर
चिराग़
वो
जले
मिलेंगे
आसमान
में
- Manoj Devdutt
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गूँध
के
गोया
पत्ती
गुल
की
वो
तरकीब
बनाई
है
रंग
बदन
का
तब
देखो
जब
चोली
भीगे
पसीने
में
Meer Taqi Meer
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तोहफ़ा,
फूल,
शिकायत,
कुछ
तो
लेकर
जा
इश्क़
से
मिलने
ख़ाली
हाथ
नहीं
जाते
Tanoj Dadhich
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न
उन
लबों
पे
तबस्सुम
न
फूल
शाख़ों
पर
गुज़र
गए
हैं
जो
मौसम
गुज़रने
वाले
थे
Kaif Uddin Khan
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लब
हैं
जैसे
गुल
सुमबुल
रंग-ए-याक़ूती
ख़ुद
को
मैख़ाना
तितली
का
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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वक़्त
ही
कम
था
फ़ैसले
के
लिए
वर्ना
मैं
आता
मशवरे
के
लिए
तुम
को
अच्छे
लगे
तो
तुम
रख
लो
फूल
तोड़े
थे
बेचने
के
लिए
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Zia Mazkoor
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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वो
मिरी
बाहों
में
बे-फ़िक्र
मुलव्विस
हुई
है
कब्र
पे
हार
कोई
फूलों
का
रक्खा
हुआ
है
Raj
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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होंठों
पर
उसके
इक
तिल
था
आया
जिस
पर
मेरा
दिल
था
उसकी
संगत
भारी
पड़ती
अक्सर
बढ़ता
मेरा
बिल
था
जो
भी
उस
सेे
मिलकर
बिछड़ा
वो
तो
मरता
फिर
तिल
तिल
था
दो
नज़रों
से
मारा
करता
ऐसा
इकलौता
क़ातिल
था
जात
अलग
थी,
मेरी
उसकी
फिर
तो
बिछड़ना
मुस्तक़बिल
था
जब
से
उसको
क्या
देखा
है
मनोज
भी
उसका
आमिल
था
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Manoj Devdutt
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संघर्ष
की
आग
में
ही
तो
तपा
हूँ
फिर
मैं
कहाँ
कच्ची
मिट्टी
का
घड़ा
हूँ
Manoj Devdutt
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आग
सीने
में
है
लगी
मेरे
फिर
सिगारे
मैं
कब
जलाता
हूँ
Manoj Devdutt
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माँ
ने
कहा
है
ख़ुश
रहा
कर
तू
ख़ुश
इसलिए
रहने
लगा
हूँ
मैं
Manoj Devdutt
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किसी
इक
की
मोहब्बत
के
ही
आड़े
आ
गया
था
मैं
मुझे
तो
प्यार
में
बस
बद्दुआ
ही
खा
गई
उसकी
Manoj Devdutt
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