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Manish Yadav
gali men ghoom kar aayi jabhi se
gali men ghoom kar aayi jabhi se | गली में घूम कर आई जभी से
- Manish Yadav
गली
में
घूम
कर
आई
जभी
से
हवा
फिर
आज
पागल
हो
गई
है
- Manish Yadav
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ग़नीमत
है
नगर
वालों
लुटेरों
से
लुटे
हो
तुम
हमें
तो
गांव
में
अक्सर,
दरोगा
लूट
जाता
है
Aalok Shrivastav
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सुना
है
लोग
उसे
आँख
भर
के
देखते
हैं
सो
उस
के
शहर
में
कुछ
दिन
ठहर
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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इस
शहर
में
जीने
के
अंदाज़
निराले
हैं
होंटों
पे
लतीफ़े
हैं
आवाज़
में
छाले
हैं
Javed Akhtar
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ऐ
शहर-ए-जान-ए-जाँ
ऐ
शहर-ए-हमदम
अगर
ज़िन्दा
रहे
फिर
आएँगे
हम
Shajar Abbas
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ये
सर्द
रात
ये
आवारगी
ये
नींद
का
बोझ
हम
अपने
शहर
में
होते
तो
घर
चले
जाते
Ummeed Fazli
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'अल्वी'
ये
मो'जिज़ा
है
दिसम्बर
की
धूप
का
सारे
मकान
शहर
के
धोए
हुए
से
हैं
Mohammad Alvi
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जो
सुनते
हैं
कि
तिरे
शहर
में
दसहरा
है
हम
अपने
घर
में
दिवाली
सजाने
लगते
हैं
Jamuna Parsad Rahi
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ऐसा
बदला
हूँ
तिरे
शहर
का
पानी
पी
कर
झूट
बोलूँ
तो
नदामत
नहीं
होती
मुझ
को
Shahid Zaki
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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'इंशा'-जी
उठो
अब
कूच
करो
इस
शहर
में
जी
को
लगाना
क्या
वहशी
को
सुकूँ
से
क्या
मतलब
जोगी
का
नगर
में
ठिकाना
क्या
Ibn E Insha
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विपरीत
क्यूँ
न
हो
चले
जीवन
की
धार
भी
ये
संग
तेरा
नाव
की
पतवार
सा
लगे
Manish Yadav
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पहचानता
हूँ
अच्छे
से
नीयतें
मैं
उनकी
वो
बातों
से
भी
अपना
ईमान
बेचते
हैं
Manish Yadav
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जब
कभी
ख़्वाब
आँख
में
आए
यूँँ
लगा
मह-जबीं
वही
आया
Manish Yadav
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भूल
जाने
में
जिनको
ज़माने
लगे
अब
की
बारिश
में
वो
याद
आने
लगे
यह
गया
है
फ़क़त
एक
ही
रास्ता
फिर
यहीं
दिल
किसी
भी
बहाने
लगे
जब
कभी
भी
सुनाई
दिली
दास्ताँ
लोग
ज़ख़्मों
को
अपने
दिखाने
लगे
इक
नया
घर
बनाने
की
ख़्वाहिश
में
अब
हम
पुरानी
दिवारें
गिराने
लगे
आने
जाने
की
जिनकी
न
रहती
ख़बर
इश्क़
में
वो
ही
मौसम
सुहाने
लगे
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Manish Yadav
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मिरे
दिल
में
पड़ा
चुपचाप
बच्चा
यकायक
आज
रोना
चाहता
है
Manish Yadav
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