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Vijay Anand Mahir
tumhein KHush dekhkar KHush hooñ magar ye dukh nahin jaata
tumhein KHush dekhkar KHush hooñ magar ye dukh nahin jaata | तुम्हें ख़ुश देखकर ख़ुश हूँ मगर ये दुख नहीं जाता
- Vijay Anand Mahir
तुम्हें
ख़ुश
देखकर
ख़ुश
हूँ
मगर
ये
दुख
नहीं
जाता
कहाँ
पर
दाद
देनी
थी
कहाँ
पर
दे
रहे
हो
तुम
- Vijay Anand Mahir
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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मुद्दत
के
बाद
ख़्वाब
में
आया
था
मेरा
बाप
और
उसने
मुझ
सेे
इतना
कहा
ख़ुश
रहा
करो
Abbas Tabish
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दफ्न
ताबूत
में
कर
तिरी
हर
ख़ुशी
जश्न
कैसे
मनाते
है
मय्यत
पे
भी
ख़ास
तारीख़
थी
इम्तिहाँ
की
मगर
आज
बारात
उसकी
बुला
ली
गई
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Shilpi
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तेरे
सिवा
भी
कई
रंग
ख़ुश
नज़र
थे
मगर
जो
तुझको
देख
चुका
हो
वो
और
क्या
देखे
Parveen Shakir
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क्या
तकल्लुफ़
करें
ये
कहने
में
जो
भी
ख़ुश
है
हम
उस
से
जलते
हैं
Jaun Elia
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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इतने
अफ़सुर्दा
नहीं
हैं
हम
कि
कर
लें
ख़ुद-कुशी
और
न
इतने
ख़ुश
कि
सच
में
मरने
की
ख़्वाहिश
न
हो
Charagh Sharma
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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कौन
सी
बात
कहाँ
कैसे
कही
जाती
है
ये
सलीक़ा
हो
तो
हर
बात
सुनी
जाती
है
एक
बिगड़ी
हुई
औलाद
भला
क्या
जाने
कैसे
माँ-बाप
के
होंठों
से
हँसी
जाती
है
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Waseem Barelvi
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अब
भलाई
है
हार
जाने
में
एक
मुख़बिर
है
शामियाने
में
काश
वो
आज
याद
आ
जाए
मैं
लगा
हूँ
जिसे
भुलाने
में
खोदने
वाले
खोद
लाए
हैं
साँप
बैठे
रहे
ख़ज़ाने
में
आप
नज़रों
से
गर
पिलाते
तो
कौन
जाता
शराब
-
ख़ाने
में
खींच
आहिस्ता
ड़ोर
रिश्तों
की
टूट
जाए
न
आज़माने
में
पेड़
गिरने
पे
ये
हुआ
महसूस
धूप
कितनी
है
इस
ज़माने
में
सोच
'माहिर'
अगर
न
आए
तो
कुछ
कसर
है
तिरे
बुलाने
में
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Vijay Anand Mahir
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तुम
सेे
मिलकर
हमने
जाना
दिल
तोड़ा
भी
जा
सकता
है
Vijay Anand Mahir
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बे-वफ़ा
होना
तुम्हारा
लाज़मी
है
तुमको
हम
हद
से
ज़ियादा
चाहते
थे
Vijay Anand Mahir
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सब
सेे
मिलने
वाले
लोग
ख़ुद
से
कम
मिल
पाते
है
Vijay Anand Mahir
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तुम्हें
जब
पड़ेगी
ज़रूरत
हमारी
पता
तब
चलेगी
मुहब्बत
हमारी
जिन्हें
भी
मुयस्सर
हो
ग़म
ख़्वार
अपना
समझ
क्या
सकेंगे
वो
हालत
हमारी
कहा
जब
मुझे
आप
अपना
बना
लो
लगाने
लगे
लोग
क़ीमत
हमारी
चराग़ों
में
अब
रोशनी
आ
गई
है
तभी
हो
रही
इतनी
ख़िदमत
हमारी
तुम्हारे
तसव्वुर
में
जो
आ
रही
है
रक़ीबों
कभी
थी
वो
चाहत
हमारी
रहेगा
यही
रंज
'माहिर'
हमेसा
हमें
मिल
न
पाई
मुहब्बत
हमारी
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Vijay Anand Mahir
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