khoob se khoob tar nahin hota | ख़ूब से ख़ूब तर नहीं होता

  - Khalid Azad
ख़ूबसेख़ूबतरनहींहोता
कोईजबदर-बदरनहींहोता
रास्तोंपेठहरतोजाताहै
परमुसाफ़िरकाघरनहींहोता
बारहाउसतरफ़चलेलेकिन
उसकीजानिबसफ़रनहींहोता
ख़्वाबकोबेचनाहैमजबूरी
साथइसकेगुज़रनहींहोता
अपनासबकुछलुटाचुकाहोजो
फिरउसेकोईडरनहींहोता
यादकबतककरोगेतुमख़ालिद
क़िस्साक्यूँमुख़्तसरनहींहोता
  - Khalid Azad
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