lautenge ab vo guzre zamaane nahin nahin | लौटेंगे अब वो गुज़रे ज़माने, नहीं नहीं

  - Khalid Azad
लौटेंगेअबवोगुज़रेज़माने,नहींनहीं
आँखोंकोअबवोख़्वाबदिखाने,नहींनहीं
शायदकिउसकेलबपेतबस्सुमकीहैघटा
मौसमकभीयेवरनासुहाने,नहींनहीं
इसबातपेख़फ़ाहैंमनानेनहींगए
तुमभीथेआएहमकोमनाने,नहींनहीं
कुछभीसबक़येलेतेजोमजनूकोदेखकर
सहरामेंआतेफिरयेदिवाने,नहींनहीं
यादोंमेंआतेजातेहैंसारेकेसारेअब
लेकिनवोघरमेंयारपुराने,नहींनहीं
बाज़ार-ए-मिस्रआजभीआबादहैंमगर
यूसुफकेजैसेअबवोख़ज़ाने,नहींनहीं
ग़मकीतलबहैमुझकोकिअबचैनकुछमिले
ख़ुशियोंकेअबयेबारउठाने,नहींनहीं
ख़ालिदजोज़िक्रआएकभीउसहसीनका
ऐसेकोईभीशे'रसुनानेनहींनहीं
  - Khalid Azad
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