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Meem Alif Shaz
zindagi ruk hi na jaa.e isliye bhi
zindagi ruk hi na jaa.e isliye bhi | ज़िन्दगी रुक ही न जाए इसलिए भी
- Meem Alif Shaz
ज़िन्दगी
रुक
ही
न
जाए
इसलिए
भी
लोग
पैसे
ख़र्च
करते
ही
नहीं
हैं
- Meem Alif Shaz
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कुछ
लोग
ख़यालों
से
चले
जाएँ
तो
सोएँ
बीते
हुए
दिन
रात
न
याद
आएँ
तो
सोएँ
Habib Jalib
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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फूल
कर
ले
निबाह
काँटों
से
आदमी
ही
न
आदमी
से
मिले
Khumar Barabankvi
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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बहुत
से
लोग
हैं
तस्वीर
में
अच्छे
बहुत
अच्छे
तेरे
चेहरे
पे
ही
मेरी
नज़र
हरदम
ठहरती
है
Umesh Maurya
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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वतन
से
मोहब्बत
भी
तो
है
ज़रूरी
वतन
ही
न
होता
तो
हम
भी
न
होते
Meem Alif Shaz
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खुलता
नहीं
है
रस्ता
मेरा
कैसे
होगा
गुज़ारा
मेरा
अपने
दर
से
न
लौटा
मुझ
को
तू
है
तो
है
सहारा
मेरा
उस
क़े
ख़त
को
जलाऊँ
कैसे
उस
में
दिल
तो
जलेगा
मेरा
मेरे
मुख़ालिफ़
क्या
कर
लेंगे
बूढ़ा
नहीं
है
जज़्बा
मेरा
घर
के
अंदर
ग़ुर्बत
देखो
चादर
का
है
साया
मेरा
मेरी
फ़कीरी
पे
हँसना
मत
सोने
का
है
काँसा
मेरा
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Meem Alif Shaz
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सब्र
ने
कर
दिखाया
ग़ज़ब
हो
गया
ज़ुल्म
को
यूँँ
हराया
ग़ज़ब
हो
गया
जो
मिरे
खौफ़
से
काँपता
था
कभी
उस
ने
मुझ
को
डराया
ग़ज़ब
हो
गया
धूप
आँगन
में
काँटे
बिछाने
लगी
अब्र
ने
यूँँ
भगाया
ग़ज़ब
हो
गया
बोलना
सीख
लेते
सितारे
अगर
हम
भी
कहते
सिखाना
ग़ज़ब
हो
गया
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Meem Alif Shaz
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दिल
इश्क़
में
अब
मुब्तिला
सा
लगता
है
यह
जिस्म
भी
मुझ
को
नया
सा
लगता
है
क्या
ऐसा
भी
हो
सकता
है
इक
अजनबी
जो
आज
भी
क़िब्ला
नुमा
सा
लगता
है
तेरे
लिए
चल
पड़ता
हूँ
मैं
बस
उधर
उस
शहर
में
जो
रास्ता
सा
लगता
है
उस
को
अभी
जाना
था
लेकिन
रुक
गया
जिस
का
मुझे
रुकना
सज़ा
सा
लगता
है
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Meem Alif Shaz
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दीवार
ने
सब
को
जुदा
कर
ही
दिया
भाई
को
भाई
से
ख़फ़ा
कर
ही
दिया
Meem Alif Shaz
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