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Meem Alif Shaz
ye raat bhi hai raat si
ye raat bhi hai raat si | ये रात भी है रात सी
- Meem Alif Shaz
ये
रात
भी
है
रात
सी
फिर
भी
लगे
है
डर
हमें
- Meem Alif Shaz
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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वो
देखने
मुझे
आना
तो
चाहता
होगा
मगर
ज़माने
की
बातों
से
डर
गया
होगा
Habib Jalib
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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कहा
जो
कृष्ण
ने
गीता
में
रक्खेगा
अगर
तू
याद
भले
जितना
घना
जंगल
हो
पर
तू
खो
नहीं
सकता
Amaan Pathan
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ज़िंदगी
तुझ
को
दिल
से
न
चाहा
मगर
बन्दगी
के
लिए
चाहना
ही
पड़ा
Meem Alif Shaz
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तेरी
तल्ख़
ज़बानी
भूल
न
पाए
हम
यानी
दिल
में
काँटा
चुभता
रहता
है
Meem Alif Shaz
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मुझ
से
ख़फ़ा
है
तो
होने
दो
ये
दुनिया
की
बीमारी
है
Meem Alif Shaz
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मुझ
पे
हँसता
है
वो
आते
जाते
हुए
दर्द
दे
जाता
है
मुस्कुराते
हुए
किस
क़दर
रौशनी
थी
मिरे
जिस्म
में
बुझ
गया
हूँ
तिरे
पास
आते
हुए
ज़िन्दगी
की
हक़ीक़त
पता
चल
गई
रोया
हूँ
ख़ाक
अपनी
उड़ाते
हुए
उस
ने
जब
हाल
पूछा
मिरा
यह
हुआ
गिर
पड़ा
अपना
क़िस्सा
सुनाते
हुए
सीखा
है
कामयाबी
मिले
किस
तरह
बारिशों
में
पतंगे
उड़ाते
हुए
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Meem Alif Shaz
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माँ
के
हाथों
का
रोटी
का
टुकड़ा
भी
पूरी
दिन
की
भूख
मिटाया
करता
था
Meem Alif Shaz
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