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Meem Alif Shaz
teri talkh zabaani bhool na paa.e ham
teri talkh zabaani bhool na paa.e ham | तेरी तल्ख़ ज़बानी भूल न पाए हम
- Meem Alif Shaz
तेरी
तल्ख़
ज़बानी
भूल
न
पाए
हम
यानी
दिल
में
काँटा
चुभता
रहता
है
- Meem Alif Shaz
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ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
Subhan Asad
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एक
तितली
से
वा'दा
है
सो
गुलशन
में,
ग़लती
से
भी
ख़ार
नहीं
देखूँगा
मैं
(ख़ार-
काँटें
)
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Darpan
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काँटे
तो
ख़ैर
काँटे
हैं
इस
का
गिला
ही
क्या
फूलों
की
वारदात
से
घबरा
के
पी
गया
Saghar Siddiqui
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जता
दिया
कि
मोहब्बत
में
ग़म
भी
होते
हैं
दिया
गुलाब
तो
काँटे
भी
थे
गुलाब
के
साथ
Rehman Faris
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उम्र
गुज़री
है
माँजते
ख़ुद
को
साफ़
हैं
पर
चमक
नहीं
पाए
डाल
ने
फूल
की
तरह
पाला
ख़ार
थे
ना
महक
नहीं
पाए
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Vishal Bagh
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तुम्हारे
दिल
की
चुभन
भी
ज़रूर
कम
होगी
किसी
के
पाँव
का
काँटा
निकाल
कर
देखो
Kunwar Bechain
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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तुम्हें
ये
दुनिया
कभी
फूल
तो
नहीं
देगी
मिले
हैं
काँटे
तो
काँटों
को
ही
गुलाब
करो
Madan Mohan Danish
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पैर
के
छालों
में
चुभते
हैं
हजारों
काँटें
फूल
तब
बाग
में
शायान
हुआ
करते
हैं
Aves Sayyad
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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कभी
हँस
के
कभी
रो
के
मिलूँगा
मैं
मैं
भी
इंसान
हूँ
ऐसे
मिलूँगा
मैं
मुझे
सब
की
मोहब्बत
चाहिए
वरना
मरीज़े
ज़र्द
के
जैसे
मिलूँगा
मैं
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Meem Alif Shaz
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ज़बान
खुश्क़
है
हमारी
इक
ज़माने
से
मियाँ
हमारे
गाँव
में
न
करना
कोई
बात
पानी
की
Meem Alif Shaz
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चाँद
फूल
ख़ुशबू
हुस्न
में
मज़ा
तो
है
मगर
बंदगी
से
अच्छा
कुछ
भी
काएनात
में
नहीं
Meem Alif Shaz
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सच्चे
रिश्तों
का
उजाला
अब
कहाँ
रोज़
का
मिलना
मिलाना
अब
कहाँ
जब
जवाँ
थे
तोड़ी
थी
दीवार
भी
जिस्म
में
मज़बूत
काँधा
अब
कहाँ
लोग
होते
थे
बचाने
के
लिए
पर
कहीं
ऐसा
किनारा
अब
कहाँ
जो
मोहब्बत
करता
था
ख़त
लिखता
था
इश्क़
लिखने
पढ़ने
वाला
अब
कहाँ
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Meem Alif Shaz
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गरीबों
से
नहीं
मिलता
ज़माना
गरीबों
को
नहीं
मिलती
मोहब्बत
Meem Alif Shaz
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