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Meem Alif Shaz
woh jhooth bolega mujhe maaloom haius ko magar sharminda karna hai mujhe
woh jhooth bolega mujhe maaloom haius ko magar sharminda karna hai mujhe | वो झूठ बोलेगा मुझे मालूम है
- Meem Alif Shaz
वो
झूठ
बोलेगा
मुझे
मालूम
है
उस
को
मगर
शर्मिंदा
करना
है
मुझे
- Meem Alif Shaz
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हमीं
तक
रह
गया
क़िस्सा
हमारा
किसी
ने
ख़त
नहीं
खोला
हमारा
मु'आफ़ी
और
इतनी
सी
ख़ता
पर
सज़ा
से
काम
चल
जाता
हमारा
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Shariq Kaifi
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ये
मयख़ाने
में
बैठ
अफ़सोस
अब
क्यूँ
तेरे
हिस्से
भी
तो
जवानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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मुझे
बातें
नहीं
तेरी
मोहब्बत
चाहिए
थी
मुझे
अफ़सोस
है
ये
मुझको
कहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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उसको
चाहा
और
चाहत
पर
क़ायम
हैं
पर
अफ़सोस
के
हम
इज़हार
नहीं
कर
सकते
Shadab Asghar
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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उम्र
भर
साँप
से
शर्मिंदा
रहे
ये
सुन
कर
जब
से
इंसान
को
काटा
है
तो
फन
दुखता
है
Munawwar Rana
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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इंसान
अपने
आप
में
मजबूर
है
बहुत
कोई
नहीं
है
बे-वफ़ा
अफ़्सोस
मत
करो
Bashir Badr
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वो
सर
भी
काट
देता
तो
होता
न
कुछ
मलाल
अफ़्सोस
ये
है
उस
ने
मेरी
बात
काट
दी
Tahir Faraz
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कोई
अपना
घर
भी
नहीं
है
अब
मेरा
जब
से
तू
ने
अपने
दिल
से
निकाला
है
Meem Alif Shaz
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सभी
अपनी
आदत
से
हारे
हुए
हैं
तभी
तो
मोहब्बत
के
मारे
हुए
हैं
अकड़ने
की
बिल्कुल
ज़रूरत
नहीं
है
सभी
आसमाँ
से
उतारे
हुए
हैं
जो
हम
से
कभी
बात
करते
नहीं
थे
बड़ी
कोशिशों
से
हमारे
हुए
हैं
जिन्होंने
किए
थे
बहुत
वादे
हम
से
मुसीबत
में
वो
सब
किनारे
हुए
हैं
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Meem Alif Shaz
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पाँव
से
काँटा
जब
हम
निकालेंगे
'शाज़'
लोग
आएँगे
तब
देखने
के
लिए
Meem Alif Shaz
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दिल
इश्क़
में
अब
मुब्तिला
सा
लगता
है
यह
जिस्म
भी
मुझ
को
नया
सा
लगता
है
क्या
ऐसा
भी
हो
सकता
है
इक
अजनबी
जो
आज
भी
क़िब्ला
नुमा
सा
लगता
है
तेरे
लिए
चल
पड़ता
हूँ
मैं
बस
उधर
उस
शहर
में
जो
रास्ता
सा
लगता
है
उस
को
अभी
जाना
था
लेकिन
रुक
गया
जिस
का
मुझे
रुकना
सज़ा
सा
लगता
है
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Meem Alif Shaz
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तुम्हारे
लफ़्ज़ों
में
इतनी
थकन
क्यूँ
है
ग़ज़ल
ज़िंदा
है
तो
उस
पे
कफ़न
क्यूँ
है
अगर
दौलत
ख़ुशी
का
है
नया
में'यार
अमीरों
की
जबीं
पे
यह
शिकन
क्यूँ
है
ये
माना
है
मोहब्बत
भी
है
इक
नेकी
तो
इस
में
बेवफ़ाई
का
चलन
क्यूँ
है
मुझे
तो
वो
मिला
है
जो
मुक़द्दर
था
मिरे
अपनों
को
मुझ
से
फिर
जलन
क्यूँ
है
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Meem Alif Shaz
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