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Meem Alif Shaz
tumhaare lafzon men itni thakan kyuuñ hai
tumhaare lafzon men itni thakan kyuuñ hai | तुम्हारे लफ़्ज़ों में इतनी थकन क्यूँ है
- Meem Alif Shaz
तुम्हारे
लफ़्ज़ों
में
इतनी
थकन
क्यूँ
है
ग़ज़ल
ज़िंदा
है
तो
उस
पे
कफ़न
क्यूँ
है
अगर
दौलत
ख़ुशी
का
है
नया
में'यार
अमीरों
की
जबीं
पे
यह
शिकन
क्यूँ
है
ये
माना
है
मोहब्बत
भी
है
इक
नेकी
तो
इस
में
बेवफ़ाई
का
चलन
क्यूँ
है
मुझे
तो
वो
मिला
है
जो
मुक़द्दर
था
मिरे
अपनों
को
मुझ
से
फिर
जलन
क्यूँ
है
- Meem Alif Shaz
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महफ़िल
में
बैठे
लोगों
को
भाने
लगी
जब
वो
मेरे
अश'आर
फ़रमाने
लगी
Rachit Sonkar
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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ये
गूँगों
की
महफ़िल
है
निकलना
ही
पड़ेगा
क्या
इतनी
ख़ता
कम
है
कि
हम
बोल
पड़े
हैं
Waseem Barelvi
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फ़र्त-ए-ख़ुशी
से
अपनी
जो
भी
रश्क
करते
हैं
उनको
तिरी
बनाई
वो
जन्नत
तलब
नहीं
Sabir Hussain
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मुबारक
मुबारक
नया
साल
आया
ख़ुशी
का
समाँ
सारी
दुनिया
पे
छाया
Akhtar Shirani
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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ये
किस
ने
फ़ोन
पे
दी
साल-ए-नौ
की
तहनियत
मुझ
को
तमन्ना
रक़्स
करती
है
तख़य्युल
गुनगुनाता
है
Ali Sardar Jafri
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तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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हो
न
हो
एक
ही
तस्वीर
के
दो
पहलू
हैं
रक़्स
करता
हुआ
तू
आग
में
जलता
हुआ
मैं
Shahid Zaki
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हमारी
सरहदों
की
ज़िन्दगी
भी
बशर
की
चाहतों
ने
छीन
ली
है
Meem Alif Shaz
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मैं
तो
हूँ
बचपन
से
ज़रा
सादा
मिज़ाज
तुम
को
मनाना
तो
मिरे
बस
का
नहीं
Meem Alif Shaz
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मेरे
दुश्मन
को
वफ़ादार
समझते
हैं
लोग
पर
मुझे
आज
भी
ग़द्दार
समझते
हैं
लोग
ग़मज़दा
होते
हुए
भी
मैं
तो
हँस
देता
हूँ
इसलिए
मुझ
को
अदाकार
समझते
हैं
लोग
इक
परिंदे
को
रिहा
ही
तो
किया
था
मैंने
आज
तक
मुझ
को
गुनहगार
समझते
हैं
लोग
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Meem Alif Shaz
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तुम
नए
लहजे
में
बात
क्यूँ
करते
हो
हम
पुराने
ही
लहजे
के
दीवाने
हैं
Meem Alif Shaz
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तुम
ने
इश्क़
में
सच
बोला
है
कैसे
यक़ीं
कर
लू
जब
मैंने
भी
तुम
से
कोई
सच
बोला
ही
नहीं
Meem Alif Shaz
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