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Meem Alif Shaz
teri kashtii doobi hai teri nadaani se
teri kashtii doobi hai teri nadaani se | तेरी कश्ती डूबी है तेरी नादानी से
- Meem Alif Shaz
तेरी
कश्ती
डूबी
है
तेरी
नादानी
से
तू
ने
छेद
छुपाया
था
अपनी
हुश्यारी
से
- Meem Alif Shaz
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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इतने
गहरे
उतर
गया
हूँ
दरिया-ए-दर्द-ए-दिल
में
हाथ
पकड़
कर
खींच
ले
वरना
डूब
के
भी
मर
सकता
हूँ
कट्टे
ख़ंजर
रस्सी
माचिस
कुछ
दिन
मुझ
सेे
दूर
रखो
कुछ
करने
से
चूक
गया
हूँ
मैं
कुछ
भी
कर
सकता
हूँ
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Vashu Pandey
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वो
थे
जवाब
के
साहिल
पे
मुंतज़िर
लेकिन
समय
की
नाव
में
मेरा
सवाल
डूब
गया
Bekal Utsahi
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उनकी
आँखें
झील
हैं
तो
क्या
करें
डूब
जाएँ
काम
धंधा
छोड़
दें?
Saurabh Sharma 'sadaf'
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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तूने
कहा
न
था
कि
मैं
कश्ती
पे
बोझ
हूँ
आँखों
को
अब
न
ढाँप
मुझे
डूबता
भी
देख
Shakeb Jalali
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बग़ैर
चश्में
के
जो
देख
भी
न
पाता
है
वो
बेवक़ूफ़
मुझे
देखना
सिखाता
है
अगर
ये
वक़्त
डुबोएगा
मेरी
नाव
को
तो
इस
सेे
कह
दो
मुझे
तैरना
भी
आता
है
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Vikram Gaur Vairagi
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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ज़माने
पहले
जिसे
डूबना
था
डूब
गया
न
जाने
अब
यहाँ
किसको
बचाने
आता
हूँ
Shariq Kaifi
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मैं
इक
फूल
भी
हूँ
मैं
तो
इक
पथ्थर
भी
हूँ
जो
करना
है
तेरे
हाथों
को
करना
है
Meem Alif Shaz
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हमारी
सरहदों
की
ज़िन्दगी
भी
बशर
की
चाहतों
ने
छीन
ली
है
Meem Alif Shaz
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तू
अगर
बोले
तो
बिखर
जाऊँ
मौत
से
पहले
ही
गुज़र
जाऊँ
अपनी
मेहनत
से
चाँद
पे
जा
कर
तेरे
डर
से
अभी
उतर
जाऊँ
होके
क़ायल
तेरी
महारत
से
मैं
भी
हर
बात
से
मुकर
जाऊँ
मैं
समुंदर
मगर
तू
इक
कश्ती
तू
कहे
और
मैं
ठहर
जाऊँ
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Meem Alif Shaz
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मुझ
को
रोना
था
मगर
कोई
सबब
नहीं
मिला
मेरी
खुश्क़
आँखों
को
कोई
अजब
नहीं
मिला
मिलने
को
मुझे
बहुत
ज़ख़ीरा
भी
मिला
मगर
ज़िन्दगी
में
जो
मिला
वो
बेतलब
नहीं
मिला
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Meem Alif Shaz
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पहले
ज़माने
में
कहाँ
रुसवाई
थी
तहज़ीब
ज़िंदा
थी,
बड़ों
का
था
अदब
Meem Alif Shaz
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