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Meem Alif Shaz
tu agar bole to bikhar jaaun
tu agar bole to bikhar jaaun | तू अगर बोले तो बिखर जाऊँ
- Meem Alif Shaz
तू
अगर
बोले
तो
बिखर
जाऊँ
मौत
से
पहले
ही
गुज़र
जाऊँ
अपनी
मेहनत
से
चाँद
पे
जा
कर
तेरे
डर
से
अभी
उतर
जाऊँ
होके
क़ायल
तेरी
महारत
से
मैं
भी
हर
बात
से
मुकर
जाऊँ
मैं
समुंदर
मगर
तू
इक
कश्ती
तू
कहे
और
मैं
ठहर
जाऊँ
- Meem Alif Shaz
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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तुम
पर
इक
दिन
मरते
मरते
मर
जाना
है,
दीवाने
को
कहाँ
ख़बर
है
घर
जाना
है
एक
शब्द
तुमको
अंधेरे
का
खौफ़
दिलाकर,
बाद
में
ख़ुद
भी
जान
बूझकर
डर
जाना
है
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Vishal Singh Tabish
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तो
क्या
उसको
मैं
होंठों
से
बजाऊँ
तिरे
दर
पे
जो
घंटी
लग
गई
है
चराग़
उसने
मिरे
लौटा
दिए
हैं
अब
उसके
घर
में
बिजली
लग
गई
है
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Fahmi Badayuni
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मैं
न
कहता
था
हिज्र
कुछ
भी
नहीं
ख़ुद
को
हलकान
कर
रही
थी
तुम
कितने
आराम
से
हैं
हम
दोनों
देखा
बेकार
डर
रही
थी
तुम
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Mehshar Afridi
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तीर
पर
तीर
लगाओ
तुम्हें
डर
किस
का
है
सीना
किस
का
है
मिरी
जान
जिगर
किस
का
है
Ameer Minai
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उसे
ज़ियादा
ज़रूरत
थी
घर
बसाने
की
वो
आ
के
मेरे
दर-ओ-बाम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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ये
सर्दी
कैसे
कटती
है
गरीबों
से
भी
तो
पूछो
हमारा
क्या
कभी
कम्बल
कभी
हीटर
में
सोते
हैं
Meem Alif Shaz
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ये
तेरे
हुस्न
की
तौहीन
होगी
अगर
तुझ
को
न
देखूँ
चाँद
देखूँ
Meem Alif Shaz
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वो
मुझ
से
भी
खफ़ा
है,
होने
दो
यह
तो
दुनिया
की
बीमारी
है
Meem Alif Shaz
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हम
को
भी
ख़ता
करने
का
इनआम
मिला
है
इक
झूठ
से
बचने
का
भी
इलज़ाम
मिला
है
Meem Alif Shaz
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अब
हमें
कोई
पहचानता
भी
नहीं
सच
को
सच
कहने
की
यह
सज़ा
है
मिली
Meem Alif Shaz
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