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Meem Alif Shaz
sambhalte sambhalte sambhal hi na paa.e
sambhalte sambhalte sambhal hi na paa.e | सँभलते सँभलते सँभल ही न पाए
- Meem Alif Shaz
सँभलते
सँभलते
सँभल
ही
न
पाए
जवानी
में
कैसे
क़दम
थे
उठाए
- Meem Alif Shaz
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जहाँ
पहुँच
के
क़दम
डगमगाए
हैं
सब
के
उसी
मक़ाम
से
अब
अपना
रास्ता
होगा
Aabid Adeeb
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हर
क़दम
हर
साँस
गिरवी
ज़िंदगी
रहम-ओ-करम
इतने
एहसानों
पे
जीने
से
तो
मर
जाना
सही
Ajeetendra Aazi Tamaam
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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अच्छा
ख़्वाब
दिखाया
तुमने
ख़्वाब
दिखाने
वालों
में
ऐसी
बात
कहाँ
होती
थी
इस
सेे
पहले
वालों
में
दरवाज़े
पर
ताला
हो
तो
फिर
भी
दस्तक
दे
देना
नाम
तो
शामिल
हो
जाएगा
दस्तक
देने
वालों
में
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Aman Shahzadi
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कोई
शहर
था
जिसकी
एक
गली
मेरी
हर
आहट
पहचानती
थी
मेरे
नाम
का
इक
दरवाज़ा
था
इक
खिड़की
मुझको
जानती
थी
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Ali Zaryoun
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बुरा
मनाया
था
हर
आहट
हर
सरगोशी
का
सोचो
कितना
ध्यान
रखा
उसने
ख़ामोशी
का
तुम
इसका
नुक़सान
बताती
अच्छी
लगती
हो
वरना
हम
को
शौक़
नहीं
है
सिगरेट-नोशी
का
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Khurram Afaq
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उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
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जब
फागुन
रंग
झमकते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
और
दफ़
के
शोर
खड़कते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
Nazeer Akbarabadi
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मेरा
दस्तक
देना
इतना
अच्छा
लगता
है
उसको
दस्तक
देना
बंद
करूँँ
तो
दरवाज़ा
खुल
जाता
है
Vishnu virat
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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अपनी
आँखों
से
आँसू
ओझल
कर
दो
सुरमा
लगा
के
फिर
मुझ
को
पागल
कर
दो
फूलों
से
सीखो
वो
कैसे
हँसते
हैं
फिर
ऐसे
ही
हँस
के
दिल
घाइल
कर
दो
काफ़ी
ग़म
मेरे
चेहरे
पे
रहते
हैं
अपनी
उल्फ़त
का
उन
पे
आँचल
कर
दो
रोया
नहीं
हूँ
मैं
भी
तो
इक
मुद्दत
से
हिज्र
मनाके
अब
मुझ
को
जल
थल
कर
दो
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Meem Alif Shaz
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शाम
होते
ही
परिंदे
लौट
आए
और
इक
तुम
हो
कि
आहट
भी
नहीं
है
Meem Alif Shaz
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बात
तो
कुछ
नहीं
है
लेकिन
तुम
कुछ
नहीं
को
बहुत
कुछ
कहते
हो
Meem Alif Shaz
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तुम
तो
घर
में
थे
तुम्हें
क्या
होगा
मालूम
रात
भर
बरसात
ने
क्या
क़हर
ढाया
Meem Alif Shaz
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मेरे
घर
में
दीवार
नहीं
होगी
मेरे
वालिद
ने
फूल
लगाए
थे
Meem Alif Shaz
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