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Meem Alif Shaz
apni aankhoñ se aañsu ojhal kar do
apni aankhoñ se aañsu ojhal kar do | अपनी आँखों से आँसू ओझल कर दो
- Meem Alif Shaz
अपनी
आँखों
से
आँसू
ओझल
कर
दो
सुरमा
लगा
के
फिर
मुझ
को
पागल
कर
दो
फूलों
से
सीखो
वो
कैसे
हँसते
हैं
फिर
ऐसे
ही
हँस
के
दिल
घाइल
कर
दो
काफ़ी
ग़म
मेरे
चेहरे
पे
रहते
हैं
अपनी
उल्फ़त
का
उन
पे
आँचल
कर
दो
रोया
नहीं
हूँ
मैं
भी
तो
इक
मुद्दत
से
हिज्र
मनाके
अब
मुझ
को
जल
थल
कर
दो
- Meem Alif Shaz
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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आन
के
इस
बीमार
को
देखे
तुझको
भी
तौफ़ीक़
हुई
लब
पर
उसके
नाम
था
तेरा
जब
भी
दर्द
शदीद
हुआ
Ibn E Insha
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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कोई
अटका
हुआ
है
पल
शायद
वक़्त
में
पड़
गया
है
बल
शायद
दिल
अगर
है
तो
दर्द
भी
होगा
इस
का
कोई
नहीं
है
हल
शायद
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Gulzar
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इसलिए
गुलदान
का
हर
फूल
बदला
मेरे
कमरे
से
तिरी
यादें
न
आए
Meem Alif Shaz
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हम
भी
सो
जाएँगे
इक
दिन
राहत
की
तरह
ख़ामोशी
से
Meem Alif Shaz
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कल
भूखे
हम
सोए
थे
या
फिर
कोई
और
कल
क्या
हुआ
था
सोच
कर
डर
लगता
है
Meem Alif Shaz
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मैं
हक़
की
बात
कहता
जा
रहा
हूँ
तभी
तो
तन्हा
छोड़ा
जा
रहा
हूँ
पड़ोसी
की
मोहब्बत
देखिएगा
मुक़दमों
से
सताया
जा
रहा
हूँ
मोहब्बत
ही
मोहब्बत
की
है
फिर
भी
मैं
घर
से
भी
निकाला
जा
रहा
हूँ
न
पूछो
मेरी
हालत
कैसी
है
अब
बिना
पानी
के
डूबा
जा
रहा
हूँ
उदासी
को
छुपाकर
अपने
दिल
में
ख़ुशी
के
नग़्में
गाता
जा
रहा
हूँ
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Meem Alif Shaz
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उसके
होटों
पर
चाकू
था
क्या
करता
मेने
उनको
चूमा,
बस
फिर
जीत
गया
Meem Alif Shaz
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