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Meem Alif Shaz
pareshaani ke ye kaise safar men hooñ
pareshaani ke ye kaise safar men hooñ | परेशानी के ये कैसे सफ़र में हूँ
- Meem Alif Shaz
परेशानी
के
ये
कैसे
सफ़र
में
हूँ
नदी
से
दूर
हूँ
फिर
भी
भँवर
में
हूँ
- Meem Alif Shaz
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बातचीत
में
आला
हो
बस
ठीक
न
हो
फ़ाइदा
क्या
महबूब
अगर
बारीक
न
हो
हम
तेरी
क़ुर्बत
में
अक्सर
सोचते
हैं
दरिया
खेत
के
इतना
भी
नज़दीक
न
हो
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Khurram Afaq
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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बहुत
ग़ुरूर
है
दरिया
को
अपने
होने
पर
जो
मेरी
प्यास
से
उलझे
तो
धज्जियाँ
उड़
जाएँ
Rahat Indori
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इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
Vashu Pandey
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कभी
दरिया
में
जिनकी
कश्तियाँ
थी
वही
अब
साहिलों
पे
रो
रहे
हैं
Siddharth Saaz
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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`तू
मेरे
पास
आ
कर
बैठ
मुझ
सेे
बात
कर
ऐ
दोस्त
ये
मुमकिन
है
कोई
दरिया
ख़राबों
से
निकल
आए
Siddharth Saaz
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आपने
मुझको
डुबोया
है
किसी
और
जगह
इतनी
गहराई
कहाँ
होती
है
दरिया
में
Tehzeeb Hafi
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दूर
से
ही
बस
दरिया
दरिया
लगता
है
डूब
के
देखो
कितना
प्यासा
लगता
है
Waseem Barelvi
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लहजे
में
अपने
नर्मी
तू
भी
लाया
कर
मुझ
को
बुलाया
कर,
मिरे
घर
आया
कर
तन्हाई
की
इस
धूप
में
मैं
जल
गया
अपनी
मोहब्बत
का
इधर
भी
साया
कर
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Meem Alif Shaz
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दिल
बहुत
चाहता
है
मुलाक़ात
हो
चाँद
कमरे
में
हो
ऐसी
इक
रात
हो
शर्म
का
पल्लू
वो
खोल
दे
और
फिर
दोनों
जानिब
से
बस
इश्क़
की
बात
हो
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Meem Alif Shaz
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नींदें
आती
ही
नहीं
हैं
गाँव
से
दूर
पैसों
ने
हम
से
सुकूँ
छीना
हमारा
Meem Alif Shaz
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अपनी
आँखों
से
आँसू
ओझल
कर
दो
सुरमा
लगा
के
फिर
मुझ
को
पागल
कर
दो
फूलों
से
सीखो
वो
कैसे
हँसते
हैं
फिर
ऐसे
ही
हँस
के
दिल
घाइल
कर
दो
काफ़ी
ग़म
मेरे
चेहरे
पे
रहते
हैं
अपनी
उल्फ़त
का
उन
पे
आँचल
कर
दो
रोया
नहीं
हूँ
मैं
भी
तो
इक
मुद्दत
से
हिज्र
मनाके
अब
मुझ
को
जल
थल
कर
दो
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Meem Alif Shaz
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ज़माना
सोचता
है
पूछता
है
तरक़्क़ी
मुझ
को
कैसे
मिल
गई
है
Meem Alif Shaz
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