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Meem Alif Shaz
main bhi mukammal ho jaaun
main bhi mukammal ho jaaun | मैं भी मुकम्मल हो जाऊँ
- Meem Alif Shaz
मैं
भी
मुकम्मल
हो
जाऊँ
तू
गर
फिर
से
मिल
जाए
- Meem Alif Shaz
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तमाम
नाख़ुदा
साहिल
से
दूर
हो
जाएँ
समुंदरों
से
अकेले
में
बात
करनी
है
Tehzeeb Hafi
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सोचता
हूँ
कि
उस
की
याद
आख़िर
अब
किसे
रात
भर
जगाती
है
Jaun Elia
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जिस
दिन
तुम्हारे
ख़त
का
मुझे
इंतिज़ार
था
उस
दिन
तमाम
पंछी
कबूतर
लगे
मुझे
Ali Rumi
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दिल-ए-नादाँ
तुझे
हुआ
क्या
है
आख़िर
इस
दर्द
की
दवा
क्या
है
Mirza Ghalib
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अब
मिरा
ध्यान
कहीं
और
चला
जाता
है
अब
कोई
फ़िल्म
मुकम्मल
नहीं
देखी
जाती
Jawwad Sheikh
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सुलग
रहे
थे
शजर
दिल
तमाम
भँवरों
के
दिल
अपना
वार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
बहुत
मलाल
हुआ
देखकर
गुलिस्ताँ
में
तमाचा
मार
रहा
था
कोई
रुख़-ए-गुल
पर
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Shajar Abbas
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कुछ
इस
तरह
से
गुज़ारी
है
ज़िन्दगी
जैसे
तमाम
उम्र
किसी
दूसरे
के
घर
में
रहा
Ahmad Faraz
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
Azhar Nawaz
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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हम
को
उम्र
से
ख़तरा
ही
ख़तरा
है
सिर
से
पैरों
तक
ज़ख़्मी
कर
देगी
Meem Alif Shaz
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काँटों
पे
भी
चलने
की
आदत
डालो
यारों
जब
ताज़ी
रोटी
न
मिले
सूखी
खालो
यारों
लोग
तो
काफ़ी
काम
भलाई
का
करते
ही
हैं
अपने
घर
में
एक
कबूतर
भी
पालो
यारों
यह
सरकार
तो
तुम
को
पूरा
घाइल
कर
देगी
अपनी
ज़ुबाँ
पे
इक
अच्छा
ताला
डालो
यारों
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Meem Alif Shaz
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तिरी
आँखों
में
काजल
भर
रहा
हूँ
कि
तुझ
को
ख़ूब-सूरत
कर
रहा
हूँ
तुझे
इस
पे
तकब्बूर
हो
न
जाए
मैं
बस
यह
सोच
के
ही
डर
रहा
हूँ
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Meem Alif Shaz
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सब
खिलौनों
की
मीठी
आवाज़ो
में
वो
मेरा
बचपन
बुलाता
है
मुझ
को
Meem Alif Shaz
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दूसरा
कोई
हुनर
भी
सीखो
तुम
इश्क़
से
यह
ज़िन्दगी
कब
चलती
है
Meem Alif Shaz
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