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Meem Alif Shaz
ham ko ishaara kar rahe ho tum tumhaara shukriya
ham ko ishaara kar rahe ho tum tumhaara shukriya | हम को इशारा कर रहे हो तुम तुम्हारा शुक्रिया
- Meem Alif Shaz
हम
को
इशारा
कर
रहे
हो
तुम
तुम्हारा
शुक्रिया
दिल
में
उमंगे
भर
रहे
हो
तुम
तुम्हारा
शुक्रिया
हम
चाँद
जैसे
ख़ूब-सूरत
तो
नहीं
बिल्कुल
मगर
हम
से
मोहब्बत
कर
रहे
हो
तुम
तुम्हारा
शुक्रिया
- Meem Alif Shaz
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भले
हैं
फ़ासले
क़ुर्बत
से
ख़ौफ़
लगता
है
ये
क्या
बला
है
जो
ऐसी
विरानी
क़ैद
हुई
Prashant Beybaar
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ऐसी
हैं
क़ुर्बतें
के
मुझी
में
बसा
है
वो
ऐसे
हैं
फ़ासले
के
नहीं
राब्ता
नसीब
Afzal Ali Afzal
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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न
जाने
कौन
सी
आए
सदा
पसंद
उसे
सो
हम
सदाएँ
बदल
कर
सदाएँ
देते
रहे
Varun Anand
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वक़्त
बर्बाद
करने
वालों
को
वक़्त
बर्बाद
कर
के
छोड़ेगा
Divakar Rahi
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गिफ़्ट
कर
देता
हूँ
उसको
मैं
किताबें,
लेकिन
उनको
पढ़
लेने
की
मोहलत
नहीं
देता
उसको
Harman Dinesh
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जानिए
उस
से
निभेगी
किस
तरह
वो
ख़ुदा
है
मैं
तो
बंदा
भी
नहीं
Jaun Elia
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हम
तोहफ़े
में
घड़ियाँ
तो
दे
देते
हैं
एक
दूजे
को
वक़्त
नहीं
दे
पाते
हैं
आँखें
ब्लैक
एंड
व्हाइट
हैं
तो
फिर
इन
में
रंग
बिरंगे
ख़्वाब
कहाँ
से
आते
हैं?
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Fareeha Naqvi
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वही
लिखने
पढ़ने
का
शौक़
था,
वही
लिखने
पढ़ने
का
शौक़
है
तेरा
नाम
लिखना
किताब
पर,
तेरा
नाम
पढ़ना
किताब
में
Bashir Badr
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सौ
मिलीं
ज़िंदगी
से
सौग़ातें
हम
को
आवारगी
ही
रास
आई
Ali Sardar Jafri
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हम
मर
गए
ज़ख़्मों
को
ही
भरते
हुए
इस
ज़िन्दगी
को
ज़िन्दगी
करते
हुए
हर
सुब्ह
रोज़ी
ढूँढने
की
कोशिशें
ये
कोशिशें
डरते
हुए,
डरते
हुए
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Meem Alif Shaz
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किताबों
में
नहीं
पढ़ा
ये
इश्क़
कैसा
है
मगर
तिरी
निगाहों
ने
सिखाया
ये
मुफ़ीद
है
बहुत
Meem Alif Shaz
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दोपहर
में
ज़ुल्फ़ें
मत
खोला
करो
शाम
ढलने
का
गुमाँ
हो
जाता
है
Meem Alif Shaz
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अपने
गुनाहों
की
सज़ा
इतनी
मिली
है
हम
को
शाज़
हर
रोज़
खाते
हैं
दवाई
फिर
भी
हम
हँसते
नहीं
Meem Alif Shaz
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मिरे
पास
भी
लौट
आना
ख़ुशी
तुम
मिरी
ज़िन्दगी
को
बचाना
ख़ुशी
तुम
Meem Alif Shaz
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