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Meem Alif Shaz
ham mar ga.e zaKHmon ko hi bharte hue
ham mar ga.e zaKHmon ko hi bharte hue | हम मर गए ज़ख़्मों को ही भरते हुए
- Meem Alif Shaz
हम
मर
गए
ज़ख़्मों
को
ही
भरते
हुए
इस
ज़िन्दगी
को
ज़िन्दगी
करते
हुए
हर
सुब्ह
रोज़ी
ढूँढने
की
कोशिशें
ये
कोशिशें
डरते
हुए,
डरते
हुए
- Meem Alif Shaz
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बुलाया
शाम
को
लेकिन
वहाँ
मैं
सुब्ह
जा
बैठा
सुना
था
देर
से
आना
उसे
अच्छा
नहीं
लगता
Krishnakant Kabk
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ये
दाग़
दाग़
उजाला
ये
शब-गज़ीदा
सहर
वो
इंतिज़ार
था
जिस
का
ये
वो
सहर
तो
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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मैं
अँधेरों
से
बचा
लाया
था
अपने
आप
को
मेरा
दुख
ये
है
मिरे
पीछे
उजाले
पड़
गए
Rahat Indori
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उजाले
अपनी
यादों
के
हमारे
साथ
रहने
दो
न
जाने
किस
गली
में
ज़िंदगी
की
शाम
हो
जाए
Bashir Badr
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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सुख़न-फ़हमों
की
बस्ती
में
सुख़न
की
ज़िन्दगी
कम
है
जहाँ
शाइर
ज़ियादा
हैं
वहाँ
पर
शा'इरी
कम
है
मैं
जुगनू
हूँ
उजाले
में
भला
क्या
अहमियत
मेरी
वहाँ
ले
जाइए
मुझको
जहाँ
पर
रौशनी
कम
है
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Balmohan Pandey
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जानता
हूँ
कि
हवाएँ
तुझे
बहकाती
हैं
जा
चराग़ों
की
तरह
तू
भी
उजाला
कर
दे
ATUL SINGH
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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दो
दफ़ा
ग़ुस्सा
हुए
वो
एक
ग़लती
पर
मेरी
रात
की
रोटी
सवेरे
काम
में
लाई
गई
Tanoj Dadhich
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कई
दिनों
से
अँधेरों
का
बोलबाला
है
चराग़
ले
के
पुकारो
कहाँ
उजाला
है
Rahat Indori
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तुम
क्यूँ
बस
झूठी
बातें
करते
हो
तुम
अख़बार
के
काम
से
ख़ुश
नइँ
हो
क्या
Meem Alif Shaz
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ये
सर्दी
जान
लेलेगी
दिसंबर
में
ख़ुशामद
कर
के
सूरज
को
बुलालो
अब
Meem Alif Shaz
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बस
तेरी
मेरी
करने
वालों
सुन
लो
क़ब्र
नहीं
देगी
हिलने
का
मौक़ा'
भी
Meem Alif Shaz
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जब
हम
ने
अपने
ग़म
को
भुलाया
उस
के
बाद
सब
ने
बातों
का
तीर
चलाया
उस
के
बाद
पहले
तो
ज़िद
की
थोड़ी
सी
रिश्वत
लेलो
जब
लेली
तो
लोगों
को
बताया
उस
के
बाद
हम
ग़ैरों
से
लाए
थे
कुछ
सच्चे
रिश्ते
अपनो
ने
तो
उन
को
भी
सताया
उस
के
बाद
हम
तो
बस
ख़ुशबू
देने
गए
थे
उन
के
घर
फिर
भी
हम
को
दुश्मन
ही
बताया
उस
के
बाद
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Meem Alif Shaz
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ज़माने
को
न
जाने
क्या
पड़ी
है
मेरे
घर
में
अगर
बाइक
खड़ी
है
Meem Alif Shaz
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