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jaani Aggarwal taak
ab iraada vasl ka baaki nahin
ab iraada vasl ka baaki nahin | अब इरादा वस्ल का बाक़ी नहीं
- jaani Aggarwal taak
अब
इरादा
वस्ल
का
बाक़ी
नहीं
फ़ुर्क़तों
में
उम्र
सारी
लग
गई
- jaani Aggarwal taak
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यार
ने
हम
से
बे-अदाई
की
वस्ल
की
रात
में
लड़ाई
की
Meer Taqi Meer
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तेरी
तासीर
से
कुछ
मेल
खा
जाए
इसी
ख़ातिर
मैं
तोहफ़े
में
गुलाबों
से
सजा
गुलदान
लाई
हूँ
Bhoomi Srivastava
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ज़िंदगी
इक
फ़िल्म
है
मिलना
बिछड़ना
सीन
हैं
आँख
के
आँसू
तिरे
किरदार
की
तौहीन
हैं
Sandeep Thakur
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थी
वस्ल
में
भी
फ़िक्र-ए-जुदाई
तमाम
शब
वो
आए
तो
भी
नींद
न
आई
तमाम
शब
Momin Khan Momin
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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मर्म
हँसने
का
समझ
पाए
ज़रा
हम
देर
से
वस्ल
जिसको
कह
रहे
थे
हिज्र
की
बुनियाद
थी
Atul K Rai
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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वो
करेंगे
वस्ल
का
वा'दा
वफ़ा
रंग
गहरे
हैं
हमारी
शाम
के
Muztar Khairabadi
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वस्ल
हो
जाए
यहीं
हश्र
में
क्या
रक्खा
है
आज
की
बात
को
क्यूँँ
कल
पे
उठा
रक्खा
है
Ameer Minai
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फ़साने
से
हक़ीक़त
बन
चुकी
हो
बला
की
ख़ूब-सूरत
बन
चुकी
हो
मुझे
इस
बात
का
अफ़सोस
भी
है
किसी
के
घर
की
इज़्ज़त
बन
चुकी
हो
तुम्हारे
वास्ते
सब
लड़
रहे
हैं
कि
जैसे
तुम
सियासत
बन
चुकी
हो
अजल
तक
बे-करारी
ही
रहेगी
न
जाने
कैसी
आदत
बन
चुकी
हो
कहीं
सुनवाई
जिसकी
हो
न
पाई
तुम
ऐसी
इक
शिकायत
बन
चुकी
हो
जिया
जाता
नहीं
मरना
भी
मुश्किल
मिरे
ख़ातिर
तो
आफ़त
बन
चुकी
हो
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jaani Aggarwal taak
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तिरी
ख़ातिर
मैं
इतना
कर
सकूँ
अगर
मरना
पड़े
तो
मर
सकूँ
तू
इतना
इश्क़
दे
मुझको
सनम
तुझे
खोने
से
मैं
भी
डर
सकूँ
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jaani Aggarwal taak
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मुहब्बत
से
नफ़रत
सी
होने
लगी
है
किया
हश्र
ऐसा
हमारा
किसी
ने
jaani Aggarwal taak
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दिल-ए-बीमार
करने
जा
रहा
है
किसी
से
प्यार
करने
जा
रहा
है
तुम्हारे
इश्क़
में
नीलाम
अपना
कोई
घर-बार
करने
जा
रहा
है
सबब
ये
है
तुम्हारे
बाद
ख़ुद
को
कोई
बेकार
करने
जा
रहा
है
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jaani Aggarwal taak
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जब
मैं
तुम
से
बात
करूँँगा
सारी
सारी
रात
करूँँगा
आए
मौसम
पतझड़
का
तो
ख़ुशियों
की
बरसात
करूँँगा
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jaani Aggarwal taak
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