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jaani Aggarwal taak
dil-e-beemaar karne ja raha hai
dil-e-beemaar karne ja raha hai | दिल-ए-बीमार करने जा रहा है
- jaani Aggarwal taak
दिल-ए-बीमार
करने
जा
रहा
है
किसी
से
प्यार
करने
जा
रहा
है
तुम्हारे
इश्क़
में
नीलाम
अपना
कोई
घर-बार
करने
जा
रहा
है
सबब
ये
है
तुम्हारे
बाद
ख़ुद
को
कोई
बेकार
करने
जा
रहा
है
- jaani Aggarwal taak
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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हाए
वो
इश्क़
छुपाने
के
ज़माने
'मोहन'
याद
आता
है
ग़लत
नाम
से
नंबर
रखना
Balmohan Pandey
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अगर
बेदाग़
होता
चाँद
तो
अच्छा
नहीं
लगता
मोहब्बत
ख़ूब-सूरत
दाग़
है,
बेदाग़
से
दिल
पर
Umesh Maurya
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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इश्क़
तिरी
इंतिहा
इश्क़
मिरी
इंतिहा
तू
भी
अभी
ना-तमाम
मैं
भी
अभी
ना-तमाम
Allama Iqbal
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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बाद
में
तुम
से
इश्क़
कर
लेंगे
पहले
ख़ुदस
तो
प्यार
कर
लें
हम
Shadab Asghar
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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कोई
पागल
ही
मोहब्बत
से
नवाज़ेगा
मुझे
आप
तो
ख़ैर
समझदार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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तिरी
गलियाँ
तिरे
क़स्बे
को
आए
हैं
इक
अरसे
बाद
इस
रस्ते
को
आए
हैं
जो
धुँदली
हो
गईं
हैं
ज़र्द
के
मारे
उन्हीं
यादों
से
हम
मिलने
को
आए
हैं
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jaani Aggarwal taak
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एक
तो
वो
शराब
दे
रहे
हैं
और
फिर
बे
हिसाब
दे
रहे
हैं
मेरे
साक़ी
ने
मुँह
बना
के
कहा
थोड़ा
ठहरो
जनाब
दे
रहे
हैं
मेरी
हिम्मत
भी
पस्त
हो
रही
है
मेरे
घुटने
जवाब
दे
रहे
हैं
शौक़
मेरा
मुझे
ले
डूबेगा
इक
बला
को
गुलाब
दे
रहे
हैं
इतने
अच्छे
भी
लोग
होते
हैं
क्या
संग
मय
के
शबाब
दे
रहे
हैं
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jaani Aggarwal taak
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था
लिखा
दर्द
इन
किताबों
पर
जम
गई
ज़र्द
इन
किताबों
पर
औरतें
पढ़
रही
फ़क़त
इनको
रो
रहा
मर्द
इन
किताबों
पर
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jaani Aggarwal taak
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दर्द
अपना
तुम्हें
सुनाऊँ
क्या
एक
आँसू
नहीं
बहाऊँ
क्या
बाँह
में
बाँह
डाले
बैठे
थे
ऐसा
इक
झूठ
था
बताऊँ
क्या
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jaani Aggarwal taak
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कभी
तन्हाई
से
निकला
बड़ी
मुश्किल
से
लेकिन
हवाले
हिज्र
के
मैं
फिर
दुबारा
हो
गया
हूँ
jaani Aggarwal taak
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