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jaani Aggarwal taak
tha likha dard in kitaabon par
tha likha dard in kitaabon par | था लिखा दर्द इन किताबों पर
- jaani Aggarwal taak
था
लिखा
दर्द
इन
किताबों
पर
जम
गई
ज़र्द
इन
किताबों
पर
औरतें
पढ़
रही
फ़क़त
इनको
रो
रहा
मर्द
इन
किताबों
पर
- jaani Aggarwal taak
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प्रेम
की
गली
में
सब
शराब
लेकर
आए
थे
हम
बहुत
ख़राब
थे
किताब
लेकर
आए
थे
Aman Akshar
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अगर
फ़ुर्सत
मिले
पानी
की
तहरीरों
को
पढ़
लेना
हर
इक
दरिया
हज़ारों
साल
का
अफ़्साना
लिखता
है
Bashir Badr
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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हम
ऐसी
कुल
किताबें
क़ाबिल-ए-ज़ब्ती
समझते
हैं
कि
जिन
को
पढ़
के
लड़के
बाप
को
ख़ब्ती
समझते
हैं
Akbar Allahabadi
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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काग़ज़
में
दब
के
मर
गए
कीड़े
किताब
के
दीवाना
बे-पढ़े-लिखे
मशहूर
हो
गया
Bashir Badr
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र
का
भी
इल्म
है
लाज़िम
फ़क़त
दिल
टूट
जाने
से
कोई
शाइर
नहीं
बनता
Avtar Singh Jasser
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'आशिक़
का
ख़त
है
पढ़ना
ज़रा
देख-भाल
के
काग़ज़
पे
रख
दिया
है
कलेजा
निकाल
के
LALA RAKHA RAM BARQ
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क़लम
भी
ख़ुद-ब-ख़ुद
हाथों
में
आके
कह
रहा
है
लिखो
जानी,
दिवाना
मैं
तुम्हारा
हो
गया
हूँ
jaani Aggarwal taak
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फ़साने
से
हक़ीक़त
बन
चुकी
हो
बला
की
ख़ूब-सूरत
बन
चुकी
हो
मुझे
इस
बात
का
अफ़सोस
भी
है
किसी
के
घर
की
इज़्ज़त
बन
चुकी
हो
तुम्हारे
वास्ते
सब
लड़
रहे
हैं
कि
जैसे
तुम
सियासत
बन
चुकी
हो
अजल
तक
बे-करारी
ही
रहेगी
न
जाने
कैसी
आदत
बन
चुकी
हो
कहीं
सुनवाई
जिसकी
हो
न
पाई
तुम
ऐसी
इक
शिकायत
बन
चुकी
हो
जिया
जाता
नहीं
मरना
भी
मुश्किल
मिरे
ख़ातिर
तो
आफ़त
बन
चुकी
हो
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jaani Aggarwal taak
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मैं
तुझे
खो
कर
के
सब
कुछ
खो
चुका
क्या
बताऊँ
कितना
तन्हा
हो
चुका
jaani Aggarwal taak
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जताता
हूँ
कि
जैसे
मैं
सभी
ग़म
भूल
जाऊँगा
मुझे
लगता
नहीं
ऐसा
कभी
ग़म
भूल
जाऊँगा
वो
लौट
आए
मिरी
इस
ज़िन्दगी
में
चाहे
जैसे
भी
क़सम
खाकर
के
कहता
हूँ
अभी
ग़म
भूल
जाऊँगा
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jaani Aggarwal taak
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रूठ
कर
मुझ
से
जा
रहे
हो
तुम
या
बहाना
बना
रहे
हो
तुम
दोस्त
मुझ
को
बना
लिया
तुम
नें
प्यार
किस
को
बना
रहे
हो
तुम
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jaani Aggarwal taak
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