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jaani Aggarwal taak
muhabbat se nafrat si hone lagii hai
muhabbat se nafrat si hone lagii hai | मुहब्बत से नफ़रत सी होने लगी है
- jaani Aggarwal taak
मुहब्बत
से
नफ़रत
सी
होने
लगी
है
किया
हश्र
ऐसा
हमारा
किसी
ने
- jaani Aggarwal taak
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हम
अपनी
जान
के
दुश्मन
को
अपनी
जान
कहते
हैं
मोहब्बत
की
इसी
मिट्टी
को
हिंदुस्तान
कहते
हैं
Rahat Indori
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याद
आई
जब
मुझे
'फ़रहत'
से
छोटी
थी
बहन
मेरे
दुश्मन
की
बहन
ने
मुझ
को
राखी
बाँध
दी
Ehsan Saqib
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मुनाफ़िक़
दोस्तों
से
लाख
बेहतर
हैं
ख़ुदा
दुश्मन
कि
ग़द्दारी
नवाबों
से
हुकूमत
छीन
लेती
है
Unknown
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मुझ
से
नफ़रत
है
अगर
उस
को
तो
इज़हार
करे
कब
मैं
कहता
हूँ
मुझे
प्यार
ही
करता
जाए
Iftikhar Naseem
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ये
रंग-ओ-नस्ल
और
तशद्दुद
के
सिलसिले
दुश्मन
की
राहतों
के
सिवा
और
कुछ
नहीं
Fatima wasiya jaayasi
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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मुझे
दुश्मन
से
भी
ख़ुद्दारी
की
उम्मीद
रहती
है
किसी
का
भी
हो
सर
क़दमों
में
सर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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सारी
दुनिया
ने
तो
नफ़रत
से
पुकारा
मुझको
माँ
समझती
है
मगर
आँख
का
तारा
मुझको
Muneer shehryaar
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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जुदा
किसी
से
किसी
का
ग़रज़
हबीब
न
हो
ये
दाग़
वो
है
कि
दुश्मन
को
भी
नसीब
न
हो
Nazeer Akbarabadi
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मुसीबतों
में
सोगवार
छोड़
कर
चले
गए
अज़ीज़
थे
मुझे
वो
यार
छोड़
कर
चले
गए
ख़ुदास
बस
यही
सवाल
करना
चाहता
हूँ
मैं
वो
कौन
लोग
थे
जो
प्यार
छोड़
कर
चले
गए
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jaani Aggarwal taak
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भरोसा
करूँँ
तो
करूँँ
कैसे
यारों
हाँ,
वादों
से
अब
तक
तो
मुकरा
नहीं
है
jaani Aggarwal taak
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फ़साने
से
हक़ीक़त
बन
चुकी
हो
बला
की
ख़ूब-सूरत
बन
चुकी
हो
मुझे
इस
बात
का
अफ़सोस
भी
है
किसी
के
घर
की
इज़्ज़त
बन
चुकी
हो
तुम्हारे
वास्ते
सब
लड़
रहे
हैं
कि
जैसे
तुम
सियासत
बन
चुकी
हो
अजल
तक
बे-करारी
ही
रहेगी
न
जाने
कैसी
आदत
बन
चुकी
हो
कहीं
सुनवाई
जिसकी
हो
न
पाई
तुम
ऐसी
इक
शिकायत
बन
चुकी
हो
जिया
जाता
नहीं
मरना
भी
मुश्किल
मिरे
ख़ातिर
तो
आफ़त
बन
चुकी
हो
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jaani Aggarwal taak
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वो
आख़िर
का
फेरा
भी
देखा
था
मैंने
मुझे
फिर
न
देखा
दोबारा
किसी
ने
jaani Aggarwal taak
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वो
यूँँ
गया
कि
कुम्भ
के
मेले
में
खो
गया
इक
मैं
था
उसके
बाद
जो
कमरे
में
खो
गया
jaani Aggarwal taak
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