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Chandan Sharma
ye to mumkin tha hi nahin kaise deta main
ye to mumkin tha hi nahin kaise deta main | ये तो मुमकिन था ही नहीं कैसे देता मैं
- Chandan Sharma
ये
तो
मुमकिन
था
ही
नहीं
कैसे
देता
मैं
तू
गर
जो
हाँ
कहती
तो
झुमके
देता
मैं
जाँ
देने
की
बात
नहीं
करता
ना
वा'दा
तू
कहती
ला
जाँ
दे
और
बस
दे
देता
मैं
- Chandan Sharma
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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बस
यूँँ
ही
मेरा
गाल
रखने
दे
मेरी
जान
आज
गाल
पर
अपने
Jaun Elia
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न
खाओ
क़स
में
वग़ैरा
न
अश्क
ज़ाया'
करो
तुम्हें
पता
है
मेरी
जान
हक़-पज़ीर
हूँ
मैं
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Amaan Haider
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तेरा
पीछा
करते
करते
जाने
क्यूँ
मैं
दुनियादारी
से
पीछे
छूट
गया
तूने
तो
ऐ
जान
महज़
दिल
तोड़ा
था
तू
क्या
जाने
मैं
अंदर
तक
टूट
गया
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Ritesh Rajwada
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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ज़ब्त
का
ऐसे
इम्तिहान
न
ले
ऐ
मेरी
जान
मेरी
जान
न
ले
Khalid Sajjad
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हम
पे
कोई
परिंद
क्यूँ
ठहरे
एक
उजड़ा
हुआ
शजर
हैं
हम
Chandan Sharma
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कहीं
वो
कॉल
कर
ले
और
नंबर
बंद
हो
मेरा
इसी
डर
से
कभी
भी
मैंने
ये
नंबर
नहीं
बदला
Chandan Sharma
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मैं
उस
के
हाथों
में
हूँ
क़ैद
ऐ
दोस्त
जो
लड़की
मेरे
किस्मत
में
नहीं
है
Chandan Sharma
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दिन
अलग
होते
रात
होती
कुछ
और
वस्ल
में
ये
हयात
होती
कुछ
और
इश्क़
में
अब
नहीं
हया
वरना
इश्क़
की
काएनात
होती
कुछ
और
इश्क़
होता
नहीं
न
जाँ
जाती
मरते
भी
तो
वफ़ात
होती
कुछ
और
जानते
गर
कि
इश्क़
जाँ
लेगा
इश्क़
से
एहतियात
होती
कुछ
और
तू
नहीं
है
तो
ज़िक्र
है
तेरा
तेरे
होने
से
बात
होती
कुछ
और
गर
जो
पढ़ती
तू
भी
मेरी
ग़ज़लें
फिर
सुख़न
की
बिसात
होती
कुछ
और
उस
को
मैं
बस
पसंद
था
"जाज़िब"
प्यार
में
तो
सिफ़ात
होती
कुछ
और
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Chandan Sharma
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ज़िंदगी
बे-ख़बर
रही
मुझ
से
ऐसे
की
ज़िंदगी
बसर
मैंने
अपने
अंदर
तुझे
बसाया
और
ढूँढ़ा
फिर
ख़ुद
को
दर-ब-दर
मैंने
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Chandan Sharma
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