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Irshad Siddique "Shibu"
udaasi meherbaani hai ye waqt ki
udaasi meherbaani hai ye waqt ki | उदासी मेहरबानी है ये वक़्त की
- Irshad Siddique "Shibu"
उदासी
मेहरबानी
है
ये
वक़्त
की
वगरना
हम
भी
मुस्कुराते
थे
बहुत
- Irshad Siddique "Shibu"
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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कोई
दीवाना
कहता
है
कोई
पागल
समझता
है
मगर
धरती
की
बेचैनी
को
बस
बादल
समझता
है
Kumar Vishwas
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तो
देख
लेना
हमारे
बच्चों
के
बाल
जल्दी
सफ़ेद
होंगे
हमारी
छोड़ी
हुई
उदासी
से
सात
नस्लें
उदास
होंगी
Danish Naqvi
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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तुम्हारी
एक
हरकत
से
उदासी
आए
चेहरे
पर
किसी
को
इस
तरह
भी
मत
करो
लाचार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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उदासी
का
सबब
उस
सेे
जो
हम
तब
पूछ
लेते
वजह
फिर
पूछनी
पड़ती
न
शायद
ख़ुद-कुशी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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इंसानों
की
हम
क्या
बात
करें
साहिब
हम
वो
हैं
जिस
से
रब
भी
रूठा
रहता
है
Irshad Siddique "Shibu"
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तू
ये
तो
देख
तू
रोता
कहाँ
हैं
बुतों
के
पास
दिल
रहता
कहाँ
हैं
सभी
दुनिया
में
अपने
दिखते
हैं
बस
यहाँ
अपना
कोई
होता
कहाँ
हैं
ख़ुशी
में
मेला
सा
लगता
है
घर
पे
ग़मों
में
मेला
ये
लगता
कहाँ
है
कि
जब
भी
आतीं
हैं
यादें
किसी
की
समुंदर
आँखों
का
रुकता
कहाँ
हैं
बयाँ
किस
सेे
करूँँ
मैं
दर्द
अपना
किसी
की
कोइ
अब
सुनता
कहाँ
है
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Irshad Siddique "Shibu"
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तेरे
बाद
किसी
को
नइँ
चाहा
मैंने
तेरे
बाद
मुहब्बत
जुर्म
लगी
मुझको
Irshad Siddique "Shibu"
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वफ़ा
नाम
पे
सब
दग़ा
कर
रहे
हैं
मोहब्बत
से
हम
इस
लिए
डर
रहे
हैं
ख़ुशी
से
कहाँ
कोई
है
जी
रहा
अब
ख़ुशी
से
तो
सब
ख़ुद-कुशी
कर
रहे
हैं
जवां
हम
हों
माँ
बाप
बूढ़े
हो
जाएँ
जवानी
से
हम
इस
लिए
डर
रहे
हैं
कि
नादानी
में
इश्क़
कर
बैठे
थे,सो
जवानी
में
अब
शा'इरी
कर
रहे
हैं
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Irshad Siddique "Shibu"
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दिखावा
ही
अगर
सच्ची
मोहब्बत
है
तो
सॉरी
ये
मोहब्बत
हम
नहीं
करते
Irshad Siddique "Shibu"
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