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Irshad Siddique "Shibu"
tere baad kisi ko nain chaaha maine
tere baad kisi ko nain chaaha maine | तेरे बाद किसी को नइँ चाहा मैंने
- Irshad Siddique "Shibu"
तेरे
बाद
किसी
को
नइँ
चाहा
मैंने
तेरे
बाद
मुहब्बत
जुर्म
लगी
मुझको
- Irshad Siddique "Shibu"
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आज
पैवंद
की
ज़रूरत
है
ये
सज़ा
है
रफ़ू
न
करने
की
Fahmi Badayuni
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मिन्नतें
करता
था
रुक
जाओ
मेरा
कोई
नहीं
मेरे
रोके
से
मगर
कौन
रुका
कोई
नहीं
बेवफ़ाई
को
बड़ा
जुर्म
बताने
वाले
याद
है
तूने
भी
चल
छोड़
हटा
कोई
नहीं
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Khan Janbaz
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या
तो
जो
ना-फ़हम
हैं
वो
बोलते
हैं
इन
दिनों
या
जिन्हें
ख़ामोश
रहने
की
सज़ा
मालूम
है
Shuja Khawar
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ये
मय-कदा
है
यहाँ
हैं
गुनाह
जाम-ब-दस्त
वो
मदरसा
है
वो
मस्जिद
वहाँ
मिलेगा
सवाब
Ali Sardar Jafri
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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तकल्लुफ़
छोड़कर
आओ
उसे
फिर
से
जिया
जाए
हमारा
बचपना
जो
एल्बमों
में
क़ैद
रहता
है
Shiva awasthi
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फ़रेब
दे
गया
इस
सादगी
से
वो
मुझको
कि
जुर्म
सारा
ही
मजबूरियों
के
सर
आया
Harsh saxena
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मिलेगी
क़ैद
से
कैसे
रिहाई
कौन
सोचेगा
यहाँ
तेरे
सिवा
तेरी
भलाई
कौन
सोचेगा
ज़माने
भर
का
तू
सोचेगा
तो
फिर
तेरे
बारे
में
मुझे
तू
ही
बता
दे
मेरे
भाई,
कौन
सोचेगा?
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Siddharth Saaz
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ख़ूब-सूरत
ये
मोहब्बत
में
सज़ा
दी
उसने
फिर
गले
मिलके
मेरी
उम्र
बढ़ा
दी
उसने
Manzar Bhopali
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करे
जो
क़ैद
जुनूँ
को
वो
जाल
मत
देना
हो
जिस
में
होश
उसे
ऐसा
हाल
मत
देना
जो
मुझ
सेे
मिलने
का
तुमको
कभी
ख़याल
आए
तो
इस
ख़याल
को
तुम
कल
पे
टाल
मत
देना
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Kashif Adeeb Makanpuri
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कोई
भी
बात
ऐसी
आप
मत
करिए
गले
से
बात
पहले
जा
के
लग
जाए
Irshad Siddique "Shibu"
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जलाता
क्यूँँ
है
प्यार
की
तू
आग
में
कि
उड़ने
दो
न
पंछियों
को
बाग़
में
Irshad Siddique "Shibu"
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चंद
पैसे
क्या
कमाने
लग
गए
लोग
आलिम
को
पढ़ाने
लग
गए
जान
जिनपे
हम
लुटाने
लग
गए
वो
भी
हमको
ही
मिटाने
लग
गए
वो
हमेशा
से
जो
मेरे
पास
था
उसको
पाने
में
ज़माने
लग
गए
जिनके
आँसू
पोछे
मैंने
आँखों
के
वो
मुझे
आँखें
दिखाने
लग
गए
बाप
का
सर
से
जो
साया
क्या
उठा
ग़म
के
साए
हक़
जताने
लग
गए
रस्ता
जिनको
भी
बताया
मैंने
वो
मुझको
ही
रस्ता
दिखाने
लग
गए
ख़ुद
को
अब
भी
ढूँढ़ने
में
हूँ
लगा
दोस्त
सब
मेरे
कमाने
लग
गए
वो
जो
मेरे
क़त्ल
के
साज़िश
में
थे
मुझ
को
देखा
मुस्कुराने
लग
गए
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Irshad Siddique "Shibu"
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वफ़ा
नाम
पे
सब
दग़ा
कर
रहे
हैं
मोहब्बत
से
हम
इस
लिए
डर
रहे
हैं
ख़ुशी
से
कहाँ
कोई
है
जी
रहा
अब
ख़ुशी
से
तो
सब
ख़ुद-कुशी
कर
रहे
हैं
जवां
हम
हों
माँ
बाप
बूढ़े
हो
जाएँ
जवानी
से
हम
इस
लिए
डर
रहे
हैं
कि
नादानी
में
इश्क़
कर
बैठे
थे,सो
जवानी
में
अब
शा'इरी
कर
रहे
हैं
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Irshad Siddique "Shibu"
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पुराने
महल
टूटता
देख
कर
मुझे
बूढ़ा
होने
से
डर
लगता
है
Irshad Siddique "Shibu"
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