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Ajay Kumar
kisi bhi baat ka shikwa nahin hai
kisi bhi baat ka shikwa nahin hai | किसी भी बात का शिकवा नहीं है
- Ajay Kumar
किसी
भी
बात
का
शिकवा
नहीं
है
हमारे
बीच
क्या
झगड़ा
नहीं
है
हमें
इक
चेहरे
की
आदत
हो
जाए
किसी
को
इतना
भी
चाहा
नहीं
है
उदासी
के
सबब
वादे
रहे
हैं
उदासी
का
सबब
धोखा
नहीं
है
हमारी
ज़ात
का
ही
मसअला
है
हमारा
मसअला
झगड़ा
नहीं
है
किसी
ने
जितनी
उम्मीदें
रखी
हैं
हमारे
पास
तो
उतना
नहीं
है
चलो
फिर
से
अकेले
ही
चलेंगे
किसी
ने
साथ
तो
आना
नहीं
है
- Ajay Kumar
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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जाँ
हम
दोनों
साथ
में
अच्छे
लगते
हैं
देखो
शे'र
मुकम्मल
अच्छा
लगता
है
Neeraj Neer
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
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राब्ता
लाख
सही
क़ाफ़िला-सालार
के
साथ
हम
को
चलना
है
मगर
वक़्त
की
रफ़्तार
के
साथ
Qateel Shifai
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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हिज्र
का
मौसम
काली
रातें
कौन
ही
काटे
ऐसी
रातें
सारे
सपने
टूट
गए
हैं
पीछे
रह
गई
बाक़ी
रातें
बेबस
करती
मुझको
अक्सर
तेरे
साथ
बिताई
रातें
हम
ने
रोना
सीख
लिया
है
देखो
जब
से
आई
रातें
भूलने
वाले
भूल
चुके
हैं
हमने
कर
ली
काली
रातें
हर
जंगल
ने
देखी
होंगी
काली
गहरी
लंबी
रातें
मेरी
तरफ़
भी
मुड़
के
देखो
काट
रहा
हूँ
कैसी
रातें
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Ajay Kumar
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मुझे
तुम
याद
करते
हो
जो
इतना
कभी
मैं
हिचकियों
से
मर
गया
तो
Ajay Kumar
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ज़िंदगी-भर
को
ख़फ़ा
रहना
है
यानी
अब
तेरे
बिना
रहना
है
दो
बरस
बीत
चुके
हैं
तन्हा
कब
तलक
और
जुदा
रहना
है
इन
उदासी
भरी
सब
बातों
में
आपका
ज़िक्र
सदा
रहना
है
एक
दिन
ख़्वाब
मुकम्मल
होंगे
आपको
ज़िद
पे
अड़ा
रहना
है
कब
के
ही
गुज़रे
बहारों
के
दिन
पेड़
को
कितना
हरा
रहना
है
शहर
के
ख़्वाब
सजाने
वाले
कहते
हैं
गाँव
में
क्या
रहना
है
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Ajay Kumar
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तिरे
बाद
ऐसे
गुज़ारा
किया
कि
मैंने
सभी
से
किनारा
किया
मैं
जिसका
सहारा
हुआ
करता
था
उसी
ने
मुझे
बे-सहारा
किया
सभी
आशिक़ों
का
बुरा
हाल
था
वही
हाल
उसने
हमारा
किया
किसी
से
शिकायत
रखेंगे
नहीं
मिरी
ओर
उसने
इशारा
किया
हजारों
तरह
के
दिवाने
हुए
कभी
तेरे
जैसा
नज़ारा
किया
तिरे
साथ
हर
सम्त
चलते
रहे
तिरा
हर
इरादा
गवारा
किया
कोई
आसमानी
सितारा
नहीं
चराग़ों
को
हम
ने
सितारा
किया
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Ajay Kumar
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गांव
से
शहर
को
जोड़ते
हैं
लोग
कितने
तो
घर
तोड़ते
है
आसमाँ
में
धनी
दौड़ता
है
बस्तियों
में
हुनर
दौड़ते
हैं
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Ajay Kumar
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