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Ajay Kumar
tire baad aise guzaara kiya
tire baad aise guzaara kiya | तिरे बाद ऐसे गुज़ारा किया
- Ajay Kumar
तिरे
बाद
ऐसे
गुज़ारा
किया
कि
मैंने
सभी
से
किनारा
किया
मैं
जिसका
सहारा
हुआ
करता
था
उसी
ने
मुझे
बे-सहारा
किया
सभी
आशिक़ों
का
बुरा
हाल
था
वही
हाल
उसने
हमारा
किया
किसी
से
शिकायत
रखेंगे
नहीं
मिरी
ओर
उसने
इशारा
किया
हजारों
तरह
के
दिवाने
हुए
कभी
तेरे
जैसा
नज़ारा
किया
तिरे
साथ
हर
सम्त
चलते
रहे
तिरा
हर
इरादा
गवारा
किया
कोई
आसमानी
सितारा
नहीं
चराग़ों
को
हम
ने
सितारा
किया
- Ajay Kumar
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जिस
शाने
पर
सर
रखते
हो
उस
शाने
पर
सो
जाते
हो
जाने
कैसे
दीदावर
हो
हर
मंज़र
में
खो
जाते
हो
Poonam Yadav
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सब
यार
सोचते
थे
रहेगा
वही
समाँ
इक
मैं
ही
बस
बचा
हूँ
कोई
सौ
पचास
में
Amaan Pathan
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मेरे
जिस्म
से
वक़्त
ने
कपड़े
नोच
लिए
मंज़र
मंज़र
ख़ुद
मेरी
पोशाक
हुआ
Azm Shakri
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कैसे
मंज़र
सामने
आने
लगे
हैं
गाते
गाते
लोग
चिल्लाने
लगे
हैं
Dushyant Kumar
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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ग़ज़ल
बनकर
मेरे
दिल
में
समा
जा
मैं
तुझको
गुनगुनाना
चाहता
हूँ
D Faiz Khan
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इश्क़
का
ज़ौक़-ए-नज़ारा
मुफ़्त
में
बदनाम
है
हुस्न
ख़ुद
बे-ताब
है
जल्वा
दिखाने
के
लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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और
भी
दुनिया
में
मंज़र
ख़ूब-सूरत
हैं
मगर
तेरी
ज़ुल्फ़ों
झटकने
से
सुहाना
कुछ
नहीं
Alankrat Srivastava
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आदमी
उम्र
को
घटाता
है
चेहरा
है
सिलवटें
दिखाता
है
मुझको
मेरे
ख़राब
होने
का
बेसबब
ही
ख़याल
आता
है
कोई
रिश्ता
हो
तो
निभाऊँ
मैं
कौन
ही
हादसा
निभाता
है
ख़ुद-कुशी
ने
किवाड़
खोले
हैं
और
वो
रस्सियाँ
बनाता
है
एक
ही
रंग
पे
निगाहें
हैं
एक
ही
रंग
मुझको
भाता
है
आपको
देखना
मुनासिब
है
आपका
मुझ
सेे
एक
नाता
है
अच्छे
लोगों
से
बात
होती
थी
अब
मुझे
कौन
ही
बुलाता
है
मैं
मुकम्मल
उदास
रहता
हूँ
एक
दुख
ऐसे
मुझको
खाता
है
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Ajay Kumar
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न
ख़्वाहिशें
बची
मिरी
कि
बद-मज़ा
है
ज़िंदगी
न
ज़िदगी
ख़राब
हो
तो
क्या
हुई
वो
दिल-लगी
Ajay Kumar
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फूल
से
धूप
का
राब्ता
हो
गया
ज़िंदगी
ख़ुश-नुमा
तजरबा
हो
गया
अजनबी
शहरस
सामना
जब
हुआ
आपके
साथ
का
हौसला
हो
गया
इक
ग़ज़ल
से
ज़रा
रू-ब-रू
क्या
हुए
उम्र
भर
का
सफ़र
मसअला
हो
गया
तुम
वहाँ
हिज्र
में
क्या
से
क्या
हो
गए
मैं
यहाँ
हिज्र
में
क्या
से
क्या
हो
गया
तेरी
मौजूदगी
का
असर
ये
हुआ
मुझको
भी
जीने
का
हौसला
हो
गया
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Ajay Kumar
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हर
मुसाफ़िर
पे
उसका
चेहरा
है
आपका
वहम
भी
ग़ज़ब
का
है
रेगज़ारों
में
दूर
का
आलम
हमको
अक्सर
क़रीब
लगता
है
हम
तबीअत
से
डूब
जाएँगे
मय-कदे
का
निज़ाम
गहरा
है
आपके
तो
अज़ीज़
होते
थे
आपने
अजनबी
बताया
है?
एक
सूखी
हुई
नदी
का
दुख
एक
वीरान
सा
किनारा
है
तब
ख़ुशी
सामने
से
आती
थी
अब
कोई
सामने
भी
आता
है?
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Ajay Kumar
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उनके
चेहरे
पर
सितारे
बैठे
हैं
फूल
पर
सारे
के
सारे
बैठे
हैं
एक
उसका
दुख
गले
लग
बैठा
है
और
बाक़ी
दुख
किनारे
बैठे
हैं
धूप
भी
क़दमों
तले
पामाल
है
फूल
फिर
किसके
सहारे
बैठे
हैं
एक
डायन
सारी
रौनक़
खा
गई
बे-कसी
दिल
में
उतारे
बैठे
हैं
हमको
मौसम
आज़माने
आए
हैं
हम
तो
पैरों
को
पसारे
बैठे
है
कौन
जाने
चाहने
वालों
का
दुख
चाहने
वाले
कँवारे
बैठे
हैं
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Ajay Kumar
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