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Ajay Kumar
aadmi umr ko ghataata hai
aadmi umr ko ghataata hai | आदमी उम्र को घटाता है
- Ajay Kumar
आदमी
उम्र
को
घटाता
है
चेहरा
है
सिलवटें
दिखाता
है
मुझको
मेरे
ख़राब
होने
का
बेसबब
ही
ख़याल
आता
है
कोई
रिश्ता
हो
तो
निभाऊँ
मैं
कौन
ही
हादसा
निभाता
है
ख़ुद-कुशी
ने
किवाड़
खोले
हैं
और
वो
रस्सियाँ
बनाता
है
एक
ही
रंग
पे
निगाहें
हैं
एक
ही
रंग
मुझको
भाता
है
आपको
देखना
मुनासिब
है
आपका
मुझ
सेे
एक
नाता
है
अच्छे
लोगों
से
बात
होती
थी
अब
मुझे
कौन
ही
बुलाता
है
मैं
मुकम्मल
उदास
रहता
हूँ
एक
दुख
ऐसे
मुझको
खाता
है
- Ajay Kumar
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नया
इक
रिश्ता
पैदा
क्यूँँ
करें
हम
?
बिछड़ना
है
तो
झगड़ा
क्यूँँ
करें
हम?
Jaun Elia
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मिरी
तरफ़
से
तो
टूटा
नहीं
कोई
रिश्ता
किसी
ने
तोड़
दिया
ए'तिबार
टूट
गया
Akhtar Nazmi
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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एक
रिश्ता
जिसे
मैं
दे
न
सका
कोई
नाम
एक
रिश्ता
जिसे
ता-उम्र
निभाए
रक्खा
Aks samastipuri
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इतना
धीरे-धीरे
रिश्ता
ख़त्म
हुआ
बहुत
दिनों
तक
लगा
नहीं
हम
बिछड़े
हैं
Ajmal Siddiqui
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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त'अल्लुक़
जो
भी
रक्खो
सोच
लेना
कि
हम
रिश्ता
निभाना
जानते
हैं
Ambreen Haseeb Ambar
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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जो
बहुत
देर
बाद
आई
है
क्या
सलीक़े
की
अंगड़ाई
है
मैंने
इन
आँखों
की
उदासी
भी
आपको
देखकर
छुपाई
है
इस
तरह
रात
भर
अकेला
था
आँखों
ने
शब
रो
कर
बिताई
है
आपने
बातें
ही
बनाई
है
और
वो
भी
सुनी-सुनाई
है
उस
कहानी
में
आप
भी
होंगे
जिस
कहानी
में
बे-वफ़ाई
है
ये
ख़ुदा
का
कोई
करिश्मा
है
आपको
मेरी
याद
आई
है
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Ajay Kumar
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मुझे
तुम
याद
करते
हो
जो
इतना
कभी
मैं
हिचकियों
से
मर
गया
तो
Ajay Kumar
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फूल
से
धूप
का
राब्ता
हो
गया
ज़िंदगी
ख़ुश-नुमा
तजरबा
हो
गया
अजनबी
शहरस
सामना
जब
हुआ
आपके
साथ
का
हौसला
हो
गया
इक
ग़ज़ल
से
ज़रा
रू-ब-रू
क्या
हुए
उम्र
भर
का
सफ़र
मसअला
हो
गया
तुम
वहाँ
हिज्र
में
क्या
से
क्या
हो
गए
मैं
यहाँ
हिज्र
में
क्या
से
क्या
हो
गया
तेरी
मौजूदगी
का
असर
ये
हुआ
मुझको
भी
जीने
का
हौसला
हो
गया
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Ajay Kumar
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नज़र
से
दूर
के
कूचे
रखी
है
बुराई
रात
के
हिस्से
रखी
है
ये
कैसा
बोतलों
का
ढेर
सा
है
ये
किसने
ज़िंदगी
पी
के
रखी
है
उदासी
को
कहाँ
पे
ढूँढते
हो
उदासी
दर्द
के
शाने
रखी
है
मैं
तो
आगे
निकल
आया
उदासी
परेशानी
ज़रा
पीछे
रखी
है
किताबों
में
दबा
कर
फ़ोटो
उसकी
गुलाबों
की
तरह
काहे
रखी
है
हमारी
ये
ख़मोशी
कौन
समझे
हमारे
दरमियाँ
जैसे
रखी
है
मिरी
हर
इक
दु'आ
तरतीब
से
है
तभी
उसकी
ख़ुशी
पहले
रखी
है
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Ajay Kumar
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गांव
से
शहर
को
जोड़ते
हैं
लोग
कितने
तो
घर
तोड़ते
है
आसमाँ
में
धनी
दौड़ता
है
बस्तियों
में
हुनर
दौड़ते
हैं
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Ajay Kumar
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