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Ajay Kumar
jo bahut der baad aayi hai
jo bahut der baad aayi hai | जो बहुत देर बाद आई है
- Ajay Kumar
जो
बहुत
देर
बाद
आई
है
क्या
सलीक़े
की
अंगड़ाई
है
मैंने
इन
आँखों
की
उदासी
भी
आपको
देखकर
छुपाई
है
इस
तरह
रात
भर
अकेला
था
आँखों
ने
शब
रो
कर
बिताई
है
आपने
बातें
ही
बनाई
है
और
वो
भी
सुनी-सुनाई
है
उस
कहानी
में
आप
भी
होंगे
जिस
कहानी
में
बे-वफ़ाई
है
ये
ख़ुदा
का
कोई
करिश्मा
है
आपको
मेरी
याद
आई
है
- Ajay Kumar
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लिपट
जाते
हैं
वो
बिजली
के
डर
से
इलाही
ये
घटा
दो
दिन
तो
बरसे
Dagh Dehlvi
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मज़ा
चहिए
जो
आख़िर
तक
उदासी
से
मोहब्बत
कर
ख़ुशी
का
क्या
है
कब
तब्दील
है
से
थी
में
हो
जाए
Atul K Rai
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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वो
कभी
आग़ाज़
कर
सकते
नहीं
ख़ौफ़
लगता
है
जिन्हें
अंजाम
से
Siraj Faisal Khan
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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ख़ाली
पड़ा
है
और
उदासी
भरा
है
दिल
सो
लोग
इस
मकान
से
आगे
निकल
गए
Ankit Maurya
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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अपनी
इस
आदत
पे
ही
इक
रोज़
मारे
जाएँगे
कोई
दर
खोले
न
खोले
हम
पुकारे
जाएँगे
Waseem Barelvi
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उदासी
और
ग़म
हैं
यार
अपने
यही
हैं
मसअले
दो
चार
अपने
मेरी
भी
ये
कहानी
रोज़
की
है
उसे
भी
याद
हैं
किरदार
अपने
कहीं
बाद-ए-सबा
पागल
हुई
है
किसी
ने
खोले
हैं
गुलज़ार
अपने
जो
उसकी
कैमरे
से
फोटो
खींचे
उसी
को
देती
है
दीदार
अपने
कोई
आबाद
कैसे
ही
रहे
फिर
तमाशा
करते
हैं
हर
बार
अपने
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Ajay Kumar
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मुझे
तुम
याद
करते
हो
जो
इतना
कभी
मैं
हिचकियों
से
मर
गया
तो
Ajay Kumar
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फूल
से
धूप
का
राब्ता
हो
गया
ज़िंदगी
ख़ुश-नुमा
तजरबा
हो
गया
अजनबी
शहरस
सामना
जब
हुआ
आपके
साथ
का
हौसला
हो
गया
इक
ग़ज़ल
से
ज़रा
रू-ब-रू
क्या
हुए
उम्र
भर
का
सफ़र
मसअला
हो
गया
तुम
वहाँ
हिज्र
में
क्या
से
क्या
हो
गए
मैं
यहाँ
हिज्र
में
क्या
से
क्या
हो
गया
तेरी
मौजूदगी
का
असर
ये
हुआ
मुझको
भी
जीने
का
हौसला
हो
गया
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Ajay Kumar
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अब
मेरी
ख़ातिर
यूँँ
हँसता
कौन
है
अब
हूँ
समझा
मैं
कि
खोया
कौन
है
तुम
हमें
बिगड़ा
बताते
हो
मगर
आजकल
वैसे
भी
सीधा
कौन
है
जो
तू
ने
मैसेज
कर
कर
के
कही
वो
तिरी
हर
बात
भूला
कौन
है
वो
मनाने
से
नहीं
हैं
मानते
ए
ख़ुदा
इतना
भी
रुसवा
कौन
है
ख़ूब-सूरत
लोग
होंगे
और
भी
इस
जहाँ
में
तेरे
जैसा
कौन
है
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Ajay Kumar
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आदमी
उम्र
को
घटाता
है
चेहरा
है
सिलवटें
दिखाता
है
मुझको
मेरे
ख़राब
होने
का
बेसबब
ही
ख़याल
आता
है
कोई
रिश्ता
हो
तो
निभाऊँ
मैं
कौन
ही
हादसा
निभाता
है
ख़ुद-कुशी
ने
किवाड़
खोले
हैं
और
वो
रस्सियाँ
बनाता
है
एक
ही
रंग
पे
निगाहें
हैं
एक
ही
रंग
मुझको
भाता
है
आपको
देखना
मुनासिब
है
आपका
मुझ
सेे
एक
नाता
है
अच्छे
लोगों
से
बात
होती
थी
अब
मुझे
कौन
ही
बुलाता
है
मैं
मुकम्मल
उदास
रहता
हूँ
एक
दुख
ऐसे
मुझको
खाता
है
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Ajay Kumar
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