tumhaare bin akelaa gham men aise jee nahin saka | तुम्हारे बिन अकेले ग़म में ऐसे जी नहीं सकता

  - Hasan Raqim
तुम्हारेबिनअकेलेग़ममेंऐसेजीनहींसकता
मैंचाहूँभीतोइनज़ख़्मोंकोतन्हासीनहींसकता
येउसकेउन्समेंजलतेदीयोंकीरौशनी,इसको
बढ़ागरवोनहींसकताबुझामैंभीनहींसकता
तुम्हारेबिनजहाँमेंबसतुम्हारीयादकोलेकर
गुज़रतोजाएगाजीवनमगरयूँँजीनहींसकता
किसीदिनमिलोमुझकोमेरीयादोंसेबाहरभी
मुझेकहनाहैक्याकुछजोबतायूँँहीनहींसकता
  - Hasan Raqim
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