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Hasan Raqim
mujhko kya kehna hai mere yaar samajh to loge nakyun likhta hooñ ye saare ash'aar samajh to loge na
mujhko kya kehna hai mere yaar samajh to loge nakyun likhta hooñ ye saare ash'aar samajh to loge na | मुझको क्या कहना है, मेरे यार समझ तो लोगे ना
- Hasan Raqim
मुझको
क्या
कहना
है,
मेरे
यार
समझ
तो
लोगे
ना
क्यूँँ
लिखता
हूँ
ये
सारे
अश'आर
समझ
तो
लोगे
ना
शायद
मैं
तुम
सेे
ये
सब
कुछ
कह
भी
ना
पाऊँ
लेकिन
छुपा
हुआ
मेरी
ग़ज़लों
में
प्यार
समझ
तो
लोगे
ना
- Hasan Raqim
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माँ-बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टंग
कर
मर
जाना
था
Shashwat Singh Darpan
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उस
ने
फेंका
मुझ
पे
पत्थर
और
मैं
पानी
की
तरह
और
ऊँचा
और
ऊँचा
और
ऊँचा
हो
गया
Kunwar Bechain
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इतना
आसान
नहीं
होता
है
शायर
कहलाना
दर्दों
को
कहने
से
पहले
सहना
भी
पड़ता
है
Harsh saxena
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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ये
दाग़
दाग़
उजाला
ये
शब-गज़ीदा
सहर
वो
इंतिज़ार
था
जिस
का
ये
वो
सहर
तो
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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हुस्न
सब
को
ख़ुदा
नहीं
देता
हर
किसी
की
नज़र
नहीं
होती
Ibn E Insha
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दिल
से
साबित
करो
कि
ज़िंदा
हो
साँस
लेना
कोई
सुबूत
नहीं
Fahmi Badayuni
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रखे
है
लज़्ज़त-ए-बोसा
से
मुझ
को
गर
महरूम
तो
अपने
तू
भी
न
होंटों
तलक
ज़बाँ
पहुँचा
Jurat Qalandar Bakhsh
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ऐ
मुझ
को
फ़रेब
देने
वाले
मैं
तुझ
पे
यक़ीन
कर
चुका
हूँ
Athar Nafees
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कर
बैठे
हो
उस
दिल
में
भी
घर
तुमको
मुबारक
वो
शख़्स
था
तो
मेरा
मगर
तुमको
मुबारक
हम
जैसे
दरख़्तों
को
ज़मीं
आख़िरी
हद
है
तुम
बादलों
के
हो
तो
ये
पर
तुमको
मुबारक
टूटे
हुए
दिल
को
है
हराम
इसका
हर
एक
जाम
इस
इश्क़
की
बोतल
का
असर
तुमको
मुबारक
मेरी
गली
से
बस
हो
गुज़र
यार
का
मेरे
बाक़ी
के
जहाँ
भर
का
गुज़र
तुमको
मुबारक
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Hasan Raqim
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ये
मत
सोचो
यार
सफ़र
बस
मंज़िल
तक
ही
सीमित
है
मैंने
उसके
आगे
भी
राहों
का
जाना
देखा
है
Hasan Raqim
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ख़ाक
दिल
को
भी
घर
करे
क्यूँँकर
कोई
आ
कर
यहाँ
मरे
क्यूँँकर
दिल
ख़ुशी
से
दिया
था
हम
ने
उसे
फिर
ग़मो
से
ये
दिल
भरे
क्यूँँकर
हम
उसे
याद
किस
तरह
आएँ
वो
हमें
याद
भी
करे
क्यूँँकर
उसके
हाथों
ने
छू
लिया
आख़िर
ज़ख़्म
रहते
ये
फिर
हरे
क्यूँँकर
मौत
हक़
है
तो
मुश्किलें
कैसी
मौत
से
आदमी
डरे
क्यूँँकर
और
भी
तो
हैं
हुस्न
वाले
यहाँ
दिल
उसी
पर
ही
जा
मरे
क्यूँँकर
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Hasan Raqim
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इतना
मुश्किल
है
हर
इक
शख़्स
को
प्यारा
होना
जैसे
तूफा़न
को
कश्ती
का
सहारा
होना
Hasan Raqim
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तुम
सेे
मिले
बिना
भी
तुमको
याद
किया
जा
सकता
है
इश्क़
में
ख़ुदको
इस
तरहा
बर्बाद
किया
जा
सकता
है
दिल
में
छुपी
हज़ारों
बातें
तुम
सेे
बोली
जा
सकतीं
हैं
क़ैद
सभी,
जज़्बातों
को
आज़ाद
किया
जा
सकता
है
इश्क़
अगर
न
हो
मुझ
सेे
तो,
छोड़
के
जा
सकते
हो
तुम
या
इस
से
बेहतर
हल
भी
ईजाद
किया
जा
सकता
है
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Hasan Raqim
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