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Rohit Gustakh
ulfat se duniya ka bair puraana hai
ulfat se duniya ka bair puraana hai | उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है
- Rohit Gustakh
उल्फ़त
से
दुनिया
का
बैर
पुराना
है
फिर
भी
दीवाने
को
शे'र
सुनाना
है
सबका
कर्ज
अदा
करके
लौटा
हूँ
मैं
बस
इक
लड़की
का
बोसा
लौटाना
है
- Rohit Gustakh
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
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Vikram Gaur Vairagi
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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जहाँ
से
जी
न
लगे
तुम
वहीं
बिछड़
जाना
मगर
ख़ुदा
के
लिए
बे-वफ़ाई
न
करना
Munawwar Rana
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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यार
दिनों
में
रातें
कौन
करे
निर्लज्जों
से
बातें
कौन
करे
Rohit Gustakh
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उसी
का
मुन्तज़िर
भी
है
हमारा
दिल
उसी
को
भूलना
भी
चाहते
है
हम
Rohit Gustakh
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ज़िन्दगी
हो
मुबारक
तुम्हारी
तुम्हें
मौत
ने
आसरा
दे
दिया
है
हमें
Rohit Gustakh
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मोहब्बत
को
पराई
कर
रही
हो
सुना
है
तुम
सगाई
कर
रही
हो
यहाँ
बस
ज़िंदगी
इक
तीरगी
है
वहाँ
तुम
मुँह-दिखाई
कर
रही
हो
क़फ़स
मायूस
हो
कर
रो
रहा
है
परिंदे
की
रिहाई
कर
रही
हो
ग़म-ए-दुनिया
से
आगे
कुछ
नहीं
है
जहाँ
तुम
आशनाई
कर
रही
हो
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Rohit Gustakh
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ये
भी
मशहूर
था
कूचे
में
उस
के
जिसे
तुम
लोग
पागल
कह
रहे
हो
Rohit Gustakh
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