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Muhammad Fuzail Khan
qasmen agar na toriye to khaaiye zaroor
qasmen agar na toriye to khaaiye zaroor | क़स
- Muhammad Fuzail Khan
क़स
में
अगर
न
तोड़िए
तो
खाइए
ज़रूर
वा'दा
किसी
से
कीजे
तो
निभाइए
ज़रूर
- Muhammad Fuzail Khan
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सवाल-ए-वस्ल
पर
कुछ
सोच
कर
उस
ने
कहा
मुझ
से
अभी
वा'दा
तो
कर
सकते
नहीं
हैं
हम
मगर
देखो
Bekhud Dehelvi
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जुगनू
को
दिन
के
वक़्त
परखने
की
ज़िद
करें
बच्चे
हमारे
अहद
के
चालाक
हो
गए
Parveen Shakir
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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तेरी
मजबूरियाँ
दुरुस्त
मगर
तूने
वा'दा
किया
था
याद
तो
कर
Nasir Kazmi
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आप
तो
मुँह
फेर
कर
कहते
हैं
आने
के
लिए
वस्ल
का
वा'दा
ज़रा
आँखें
मिला
कर
कीजिए
Lala Madhav Ram Jauhar
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जानता
हूँ
मैं
कि
तुम
वा'दा
फ़रामोश
नहीं
बस
तुम्हें
याद
दिलाने
में
मज़ा
आता
है
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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सुबूत
है
ये
मोहब्बत
की
सादा-लौही
का
जब
उस
ने
वा'दा
किया
हम
ने
ए'तिबार
किया
Josh Malihabadi
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मुझ
सेे
वा'दा
करने
वाले
वा'दा
करके
भूल
गए
अच्छा
ख़ासा
पीतल
था
मैं
सोना
करके
भूल
गए
Tanoj Dadhich
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मैं
रस्मन
कह
रहा
हूँ
''फिर
मिलेंगे''
ये
मत
समझो
कि
वा'दा
कर
रहा
हूँ
Zubair Ali Tabish
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मुहब्बत
में
जो
माथा
चूम
कर
वा'दा
किया
उसने
उसे
भी
आम
बातों
का
ही
दर्जा
दे
दिया
उसने
सुधा
के
नाम
पर
विषपान
अब
हम
सेे
नहीं
होगा
सुना
ज्यूँँ
ही
मुहब्बत
से
किनारा
कर
लिया
उसने
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Atul K Rai
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अपना
भी
है
लेकिन
वो
पराया
भी
बहुत
है
उस
शख़्स
को
हाँ
हमने
सताया
भी
बहुत
है
Muhammad Fuzail Khan
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हमेशा
की
तरह
फिर
इक
अधूरा
ख़्वाब
देखा
है
हमेशा
की
तरह
फिर
से
किनारा
कर
लिया
तुमने
Muhammad Fuzail Khan
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कुछ
घर
अंदर
से
बाहर
तक
जगमग-जगमग
रहते
हैं
कुछ
घर
के
आंगन
में
केवल
एक
दीया
ही
जलता
है
Muhammad Fuzail Khan
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उदास
बैठे
हैं
सारे
रस्ते
बहुत
दिनों
से
बहुत
दिनों
से
गुज़र
तुम्हारा
नहीं
हुआ
है
Muhammad Fuzail Khan
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तिरी
नज़रों
से
जो
ख़ुद
को
अभी
देखा
हमने
हर
ख़ामी
में
मुझको
ख़ूबी
नज़र
आने
लगी
Muhammad Fuzail Khan
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