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Muhammad Fuzail Khan
hamesha ki tarah phir ik adhoora KHvaab dekha hai
hamesha ki tarah phir ik adhoora KHvaab dekha hai | हमेशा की तरह फिर इक अधूरा ख़्वाब देखा है
- Muhammad Fuzail Khan
हमेशा
की
तरह
फिर
इक
अधूरा
ख़्वाब
देखा
है
हमेशा
की
तरह
फिर
से
किनारा
कर
लिया
तुमने
- Muhammad Fuzail Khan
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इस
ज़माने
में
भी
इक
लड़का
तुम्हें
यूँँ
चाहता
है
अपने
रब
से
वो
तुम्हारी
जैसी
बेटी
माँगता
है
तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
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Harsh saxena
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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सियाह
रात
की
सरहद
के
पार
ले
गया
है
अजीब
ख़्वाब
था
आँखें
उतार
ले
गया
है
है
अब
जो
ख़ल्क़
में
मजनूँ
के
नाम
से
मशहूर
वो
मेरी
ज़ात
से
वहशत
उधार
ले
गया
है
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Abhishek shukla
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बहुत
मुश्किल
है
कोई
यूँँ
वतन
की
जान
हो
जाए
तुम्हें
फैला
दिया
जाए
तो
हिन्दुस्तान
हो
जाए
Kumar Vishwas
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ख़ाक
हो
जाएँगे
हम
ख़ाक
में
मिल
कर
तेरी
तुझ
सेे
रिश्ता
न
कभी
अरज़े
वतन
टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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मुसलसल
तजरबों
का
है
नतीजा
मैं
दरया
से
किनारा
हो
गया
हूँ
Madan Mohan Danish
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नहीं
मैं
रह
नहीं
सकता
यहीं
मैं
कह
नहीं
सकता
किनारा
है
तभी
हूँ
मैं
नहीं
तो
बह
नहीं
सकता
पुरानी
एक
इमारत
हूँ
कि
क्या
देखा
नहीं
मैंने
किसी
के
छोड़
जाने
से
तो
मैं
यूँँ
ढह
नहीं
सकता
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Praveen Bhardwaj
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जितना
होना
था
हो
चुकी
बारिश
अब
तो
सब
कुछ
भिगो
चुकी
बारिश
वो
जो
छोड़ी
थीं
नांवें
बचपन
में
उनको
कब
का
डुबो
चुकी
बारिश
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Muhammad Fuzail Khan
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तिरी
नज़रों
से
जो
ख़ुद
को
अभी
देखा
हमने
हर
ख़ामी
में
मुझको
ख़ूबी
नज़र
आने
लगी
Muhammad Fuzail Khan
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तो
क्यूँ
न
अब
कुछ
नया
किया
जाए
लबों
से
सब
कुछ
बयाँ
किया
जाए
Muhammad Fuzail Khan
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अपना
भी
है
लेकिन
वो
पराया
भी
बहुत
है
उस
शख़्स
को
हाँ
हमने
सताया
भी
बहुत
है
Muhammad Fuzail Khan
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यही
इक
बात
रह-रहकर
मिरे
दिल
को
सताती
है
कि
आख़िर
क्यूँ
वो
रोया
था
बिछड़ने
से
ज़रा
पहले
Muhammad Fuzail Khan
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