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Praveen Bhardwaj
nahin main rah nahin saka yahiin main kah nahin saka
nahin main rah nahin saka yahiin main kah nahin saka | नहीं मैं रह नहीं सकता यहीं मैं कह नहीं सकता
- Praveen Bhardwaj
नहीं
मैं
रह
नहीं
सकता
यहीं
मैं
कह
नहीं
सकता
किनारा
है
तभी
हूँ
मैं
नहीं
तो
बह
नहीं
सकता
पुरानी
एक
इमारत
हूँ
कि
क्या
देखा
नहीं
मैंने
किसी
के
छोड़
जाने
से
तो
मैं
यूँँ
ढह
नहीं
सकता
- Praveen Bhardwaj
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ज़बाँ
हमारी
न
समझा
यहाँ
कोई
'मजरूह'
हम
अजनबी
की
तरह
अपने
ही
वतन
में
रहे
Majrooh Sultanpuri
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मुसलसल
तजरबों
का
है
नतीजा
मैं
दरया
से
किनारा
हो
गया
हूँ
Madan Mohan Danish
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दिल
से
निकलेगी
न
मर
कर
भी
वतन
की
उल्फ़त
मेरी
मिट्टी
से
भी
ख़ुशबू-ए-वफ़ा
आएगी
Lal Chand Falak
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मुझे
अपना
किनारा
कम
था
'दानिश'
बढ़ा
ली
मैंने
फिर
गहराई
अपनी
Madan Mohan Danish
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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सियाह
रात
की
सरहद
के
पार
ले
गया
है
अजीब
ख़्वाब
था
आँखें
उतार
ले
गया
है
है
अब
जो
ख़ल्क़
में
मजनूँ
के
नाम
से
मशहूर
वो
मेरी
ज़ात
से
वहशत
उधार
ले
गया
है
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Abhishek shukla
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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मज़हब
नहीं
सिखाता
आपस
में
बैर
रखना
हिन्दी
हैं
हम
वतन
है
हिन्दोस्ताँ
हमारा
Allama Iqbal
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बहुत
मुश्किल
है
कोई
यूँँ
वतन
की
जान
हो
जाए
तुम्हें
फैला
दिया
जाए
तो
हिन्दुस्तान
हो
जाए
Kumar Vishwas
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मोहब्बत
की
तो
कोई
हद,
कोई
सरहद
नहीं
होती
हमारे
दरमियाँ
ये
फ़ासले,
कैसे
निकल
आए
Khalid Moin
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मिलना
तो
चाहिए
था
मगर
मिल
नहीं
रहे
आँगन
में
मेरे
फूल
हैं
जो
खिल
नहीं
रहे
जो
उनके
पास
नइँ
है
तो
अब
चाहते
हैं
वो
हम
जैसों
के
भी
पास
में
अब
दिल
नहीं
रहे
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Praveen Bhardwaj
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वो
इश्क़
में
भी
रहते
हैं
जो
होश
में
कहते
हैं
झूठ
उनको
मोहब्बत
है
नहीं
Praveen Bhardwaj
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अगर
कुछ
बच
गया
है
तो
जला
दो
लगाओ
आग
दिल
में
और
सज़ा
दो
हमीं
पर
चल
रही
हैं
चारा-साज़ी
दवा
तो
मिल
रही
है
बस
दु'आ
दो
कहेगा
क्या
ज़माना
ये
न
सोचो
अभी
भी
चाहते
हो
तो
बता
दो
बराबर
जुर्म
है
ये
भी
समझ
लो
गले
पर
हाथ
डालो
या
दबा
दो
कभी
ख़्वाहिश
दिलों
की
मत
दबाना
अगर
थोड़ी
बची
हो
तो
हवा
दो
अगर
सच
कह
रहे
हो
तो
न
डरना
सभी
को
आइना
आओ
दिखा
दो
ये
कैसी
यार
बातें
कर
रहे
हो
हमें
तुम
रोक
लो
या
रास्ता
दो
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Praveen Bhardwaj
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इश्क़
से
बढ़कर
कुछ
नइँ
है
या
फिर
बद्तर
कुछ
नइँ
है
उसकी
आँखें
जान
गई
आगे
ख़ंजर
कुछ
नइँ
है
जीना
है
कितना
मुश्क़िल
इस
से
दूभर
कुछ
नइँ
है
मैं
भी
हूँ
कितना
वीरान
दिल
के
अंदर
कुछ
नइँ
है
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Praveen Bhardwaj
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किसी
भी
और
दरिया
का
किनारा
हो
नहीं
सकता
हमारे
पास
होकर
वो
हमारा
हो
नहीं
सकता
Praveen Bhardwaj
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