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Zubair Ali Tabish
main rasman kah raha hooñ phir milenge
main rasman kah raha hooñ phir milenge | मैं रस्मन कह रहा हूँ ''फिर मिलेंगे''
- Zubair Ali Tabish
मैं
रस्मन
कह
रहा
हूँ
''फिर
मिलेंगे''
ये
मत
समझो
कि
वा'दा
कर
रहा
हूँ
- Zubair Ali Tabish
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सुबूत
है
ये
मोहब्बत
की
सादा-लौही
का
जब
उस
ने
वा'दा
किया
हम
ने
ए'तिबार
किया
Josh Malihabadi
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ये
शहर-ए-अजनबी
में
अब
किसे
जा
कर
बताएँ
हम
कहाँ
के
रहने
वाले
हैं
कहाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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हमारे
दिल
में
तुम
गहरे
न
उतरो
किसी
की
याद
का
गोदाम
होगा
Tanoj Dadhich
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याद
उसे
इंतिहाई
करते
हैं
सो
हम
उस
की
बुराई
करते
हैं
Jaun Elia
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याद
उसे
भी
एक
अधूरा
अफ़्साना
तो
होगा
कल
रस्ते
में
उस
ने
हम
को
पहचाना
तो
होगा
Javed Akhtar
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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फिर
उसी
सितमगर
को
याद
कर
रहे
हैं
हम
यानी
बे-वजह
ग़म
ईजाद
कर
रहे
हैं
हम
Harsh saxena
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अब
तो
उन
की
याद
भी
आती
नहीं
कितनी
तन्हा
हो
गईं
तन्हाइयाँ
Firaq Gorakhpuri
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ज़रा
सी
देर
आँखों
में
चली
जाए
तुम्हारी
याद
बहुत
दिन
हो
गए
दिल
का
मुझे
झाड़ू
लगाना
है
Tanoj Dadhich
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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आज
तो
दिल
के
दर्द
पर
हँस
कर
दर्द
का
दिल
दुखा
दिया
मैं
ने
Zubair Ali Tabish
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चल
दिए
फेर
कर
नज़र
तुम
भी
ग़ैर
तो
ग़ैर
थे
मगर
तुम
भी
ये
गली
मेरे
दिलरुबा
की
है
दोस्तों
ख़ैरियत
इधर
तुम
भी
मुझपे
लोगों
के
साथ
हँसते
हो
लोग
रोएँगे
ख़ास
कर
तुम
भी
मुझको
ठुकरा
दिया
है
दुनिया
ने
मैं
तो
मर
जाऊँगा
अगर
तुम
भी
उसकी
गाड़ी
तो
जा
चुकी
'ताबिश'
अब
उठो
जाओ
अपने
घर
तुम
भी
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Zubair Ali Tabish
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वो
पास
क्या
ज़रा
सा
मुस्कुरा
के
बैठ
गया
मैं
इस
मज़ाक़
को
दिल
से
लगा
के
बैठ
गया
दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
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Zubair Ali Tabish
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अब
तलक
उस
को
ध्यान
हो
मेरा
क्या
पता
ये
गुमान
हो
मेरा
Zubair Ali Tabish
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