unki nigaah-e-shokh ki barkat nahin mili | उनकी निगाह-ए-शोख़ की बरकत नहीं मिली

  - Shadab Asghar
उनकीनिगाह-ए-शोख़कीबरकतनहींमिली
शहरतबहुतमिलीहैमुहब्बतनहींमिली
हमकोनिकालफेंकागयाबे-दिलीकेसाथ
हमकोकिसीकेदिलमेंभीइज़्ज़तनहींमिली
सबकोकहाँमिलाहैजहाँमेंतमामकुछ
दरवाजामिलगयाहैमगरछतनहींमिली
उसकोमिलाहैवोजोउसेचाहिएथा
हमकोमिलाहैज़िस्मपरउल्फ़तनहींमिली
'उम्रेंगुज़रगईंतेरेदरपरखड़े-खड़े
कैसेजोदिलमेंआएइज़ाज़तनहींमिली
हाथोंमेंहाथडालकेहमताज़देखते
लेकिनकिसीभीहाथकीबैअतनहींमिली
कुछइसलिएभीशे'रसुनातेंनहींहैंजल्द
हमकोहमारेशे'रकीकीमतनहींमिली
  - Shadab Asghar
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