gham-e-hijraan ka hai mausam tumhaari yaad aati hai | ग़म-ए-हिज्राँ का है मौसम तुम्हारी याद आती है

  - Divyansh "Dard" Akbarabadi
ग़म-ए-हिज्राँकाहैमौसमतुम्हारीयादआतीहै
किसीकीशक़्लमेंहरदमतुम्हारीयादआतीहै
हज़ारोंदुखदिएजाताहैयेवक़्त-ए-सहरहमको
गुलोंपरदेखकरशबनमतुम्हारीयादआतीहै
तोपाओगेतुमहीतोपाएँगेहमही
चलोअच्छाहैकमसेकमतुम्हारीयादआतीहै
कोईज़ंजीरहो,पायलहोयाफिरटूटतीआवाज़
कहींभीसुनलेंगर,पैहमतुम्हारीयादआतीहै
उलझकररहगएइसकश्मकशमेंक्यूँँयेहोताहै
जोवोसुलझाएपेच-ओ-ख़मतुम्हारीयादआतीहै
हुआजोथायाफिरजैसेयहीइक'दर्द'खाएहै
परइतनाजानतेहैंहमतुम्हारीयादआतीहै
  - Divyansh "Dard" Akbarabadi
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