dil-e-naadaan ko sunsaan bhi rakha nahin tumne | दिल-ए-नादान को सुनसान भी रक्खा नहीं तुमने

  - Divyansh "Dard" Akbarabadi
दिल-ए-नादानकोसुनसानभीरक्खानहींतुमने
किसीकोमाहभरमेहमानभीरक्खानहींतुमने
ख़ुदअपनीआँखमेंतूफ़ानभीरक्खानहींतुमने
फ़साहतकाकोईसामानभीरक्खानहींतुमने
मुझेउम्मीदथीइसबारमुझकोछोड़जाओगे
मुझेइसबारतोहैरानभीरक्खानहींतुमने
किसीसेवस्लकेभीबादतुमहमकोगवाराथे
औरऐसेफ़ैसलेका,मानभी,रक्खानहींतुमने
दर-ओ-दीवारपेनाख़ूनसेलाइनबनाडाली
येक्याइंसानकोइंसानभीरक्खानहींतुमने
  - Divyansh "Dard" Akbarabadi
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