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Dinesh Sen Shubh
wahin se haar kar lautaa musaafir
wahin se haar kar lautaa musaafir | वहीं से हार कर लौटा मुसाफ़िर
- Dinesh Sen Shubh
वहीं
से
हार
कर
लौटा
मुसाफ़िर
जहाँ
से
जीत
कर
जाना
भला
था
- Dinesh Sen Shubh
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तू
मेरा
इश्क़-विश्क
था
वरना
हम
तुझे
जीत
लेते
धोखे
से
Shadab Asghar
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हस्ती
का
नज़ारा
क्या
कहिए
मरता
है
कोई
जीता
है
कोई
जैसे
कि
दिवाली
हो
कि
दिया
जलता
जाए
बुझता
जाए
Nushur Wahidi
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खेल
ज़िंदगी
के
तुम
खेलते
रहो
यारो
हार
जीत
कोई
भी
आख़िरी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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आह
को
चाहिए
इक
उम्र
असर
होने
तक
कौन
जीता
है
तिरी
ज़ुल्फ़
के
सर
होने
तक
Mirza Ghalib
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बला
की
ख़ूब-सूरत
वो
उसे
ही
देख
जीता
हूँ
मुझे
उसकी
ज़रूरत
है,
न
मैं
उसका
चहीता
हूँ
कभी
उसको
परेशानी
मिरे
सिगरेट
से
होती
थी
उसे
बोलो
अभी
कोई
कि
मैं
दारू
भी
पीता
हूँ
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Deepankar
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इस
आरज़ी
दुनिया
में
हर
बात
अधूरी
है
हर
जीत
है
ला-हासिल
हर
मात
अधूरी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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देश
मेरा
जंग
तो
जीता
मगर
लौट
कर
आया
नहीं
बेटा
मेरा
Divy Kamaldhwaj
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अगर
तू
ख़ुश
है
मेरी
हार
से
तो
मेरी
हर
जीत
से
नफ़रत
है
मुझको
Shadab Javed
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हर
दिन
ही
मोहब्बत
को
पाने
की
लड़ाई
में
जो
हार
नहीं
सकता
वो
जीत
नहीं
सकता
Hasan Raqim
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जीत
हूँ
जश्न-ए-मुक़द्दर
हूँ
मैं
ठीक
से
देख
सिकंदर
हूँ
मैं
Ritesh Rajwada
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तमाम
रात
निकलनी
है
याद
करने
में
तमाम
दिन
हुई
थीं
कोशिशें
भुलाने
की
Dinesh Sen Shubh
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कोई
आवाज़
देता
है
कहीं
से
मगर
दिखता
नहीं
है
कौन
है
वो
Dinesh Sen Shubh
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तसव्वुर
में
बिठा
कर
ले
गए
हो
उसे
अपना
बना
कर
ले
गए
हो
मुझे
आज़ाद
तो
जाना
था
करके
अगर
पिंज़रा
उठा
कर
ले
गए
हो
बड़ी
मुश्किल
में
हूँ
रहना
कहाँ
है
मिरा
घर
ही
सजा
कर
ले
गए
हो
बताओ
धड़
भला
किस
काम
का
है
वो
सर
जिसका
जुदा
कर
ले
गए
हो
शहर
में
और
भी
धन
के
घड़े
थे
मिरा
दिलबर
चुरा
कर
ले
गए
हो
किसी
की
रात
काली
कर
गए
हो
किसी
दिन
का
दिवाकर
ले
गए
हो
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Dinesh Sen Shubh
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मसअला
ये
नहीं
है
तुम
आओ
हाँ
मगर
तुम
से
कौन
अच्छा
है
Dinesh Sen Shubh
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बहुत
अच्छा
हुआ
तो
क्या
करोगी
ज़रा
रूठोगी
या
शिकवा
करोगी
मिरे
हालात
समझोगी
अगर
तुम
मिरी
जानाँ
मुझे
बोसा
करोगी
हवाएँ
आ
रही
हैं
ये
कहाँ
से
अकेले
में
किसे
पूछा
करोगी
अगर
होता
यक़ीं
मुझ
पर
जरा
सा
तुम्हें
लगता
था
क्या
ऐसा
करोगी
मुसाफ़िर
जा
रहा
है
हाथ
ख़ाली
अता
करना
है
या
रुस्वा
करोगी
सज़ा
होनी
है
अब
इक
बेगुनाह
को
सुनो
ऐसे
में
क्या
सज्दा
करोगी
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Dinesh Sen Shubh
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