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Dinesh Sen Shubh
koi awaaz deta hai kahii se
koi awaaz deta hai kahii se | कोई आवाज़ देता है कहीं से
- Dinesh Sen Shubh
कोई
आवाज़
देता
है
कहीं
से
मगर
दिखता
नहीं
है
कौन
है
वो
- Dinesh Sen Shubh
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भटकती
फिर
रही
है
आँख
घर
में
तिरी
आवाज़
इसको
दिख
रही
है
Himanshu Kiran Sharma
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मुझे
रोना
नहीं
आवाज़
भी
भारी
नहीं
करनी
मोहब्बत
की
कहानी
में
अदाकारी
नहीं
करनी
Afzal Khan
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ख़ामोशी
में
आवाज़
का
किरदार
कोई
है
जो
बोलता
रहता
है
लगातार,
कोई
है
Shakeel Gwaliari
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आवाज़
दे
के
देख
लो
शायद
वो
मिल
ही
जाए
वर्ना
ये
उम्र
भर
का
सफ़र
राएगाँ
तो
है
Muneer Niyazi
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बिछड़कर
उसका
दिल
लग
भी
गया
तो
क्या
लगेगा
वो
थक
जाएगा
और
मेरे
गले
से
आ
लगेगा
मैं
मुश्किल
में
तुम्हारे
काम
आऊँ
या
ना
आऊँ
मुझे
आवाज़
दे
लेना
तुम्हें
अच्छा
लगेगा
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Tehzeeb Hafi
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इस
शहर
में
जीने
के
अंदाज़
निराले
हैं
होंटों
पे
लतीफ़े
हैं
आवाज़
में
छाले
हैं
Javed Akhtar
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ये
भी
एजाज़
मुझे
इश्क़
ने
बख़्शा
था
कभी
उस
की
आवाज़
से
मैं
दीप
जला
सकता
था
Ahmad Khayal
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हमको
बस
आवाज़
लगानी
होती
है
पीछे
मुड़ना
काम
तुम्हारा
रहता
है
Anurag Pandey
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मेरी
ख़ामोशियों
में
लर्ज़ां
है
मेरे
नालों
की
गुम-शुदा
आवाज़
Faiz Ahmad Faiz
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तिरी
सदा
का
है
सदियों
से
इंतिज़ार
मुझे
मिरे
लहू
के
समुंदर
ज़रा
पुकार
मुझे
Khalilur Rahman Azmi
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जिस्म
से
रूह
ज्यूँ
निकलती
है
बेटियाँ
माँ
के
घर
से
जाती
हैं
Dinesh Sen Shubh
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बहाना
है
कि
रोका
था
हमीं
ने
कहो
ना
आपका
भी
मन
नहीं
था
Dinesh Sen Shubh
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मसअला
ये
नहीं
है
तुम
आओ
हाँ
मगर
तुम
से
कौन
अच्छा
है
Dinesh Sen Shubh
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बहुत
अच्छा
हुआ
तो
क्या
करोगी
ज़रा
रूठोगी
या
शिकवा
करोगी
मिरे
हालात
समझोगी
अगर
तुम
मिरी
जानाँ
मुझे
बोसा
करोगी
हवाएँ
आ
रही
हैं
ये
कहाँ
से
अकेले
में
किसे
पूछा
करोगी
अगर
होता
यक़ीं
मुझ
पर
जरा
सा
तुम्हें
लगता
था
क्या
ऐसा
करोगी
मुसाफ़िर
जा
रहा
है
हाथ
ख़ाली
अता
करना
है
या
रुस्वा
करोगी
सज़ा
होनी
है
अब
इक
बेगुनाह
को
सुनो
ऐसे
में
क्या
सज्दा
करोगी
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Dinesh Sen Shubh
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हो
गहरी
बात
तो
गहराई
से
समझा
करो
यारो
कोई
शा'इर
कभी
अश'आर
बेमतलब
नहीं
लिखता
Dinesh Sen Shubh
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