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Dinesh Sen Shubh
jism se rooh jyon nikalti hai
jism se rooh jyon nikalti hai | जिस्म से रूह ज्यूँ निकलती है
- Dinesh Sen Shubh
जिस्म
से
रूह
ज्यूँ
निकलती
है
बेटियाँ
माँ
के
घर
से
जाती
हैं
- Dinesh Sen Shubh
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अश्क
माँ
के
जो
ख़ुशी
से
गिरे
तो
हैं
मोती
और
छलके
जो
ग़मों
से
तो
लहू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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मैंने
कल
शब
चाहतों
की
सब
किताबें
फाड़
दीं
सिर्फ़
इक
काग़ज़
पे
लिक्खा
लफ़्ज़-ए-माँ
रहने
दिया
Munawwar Rana
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जब
भी
कश्ती
मिरी
सैलाब
में
आ
जाती
है
माँ
दु'आ
करती
हुई
ख़्वाब
में
आ
जाती
है
Munawwar Rana
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ये
ऐसा
क़र्ज़
है
जो
मैं
अदा
कर
ही
नहीं
सकता
मैं
जब
तक
घर
न
लौटूँ
मेरी
माँ
सज्दे
में
रहती
है
Munawwar Rana
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खिलौनों
की
तरफ़
बच्चे
को
माँ
जाने
नहीं
देती
मगर
आगे
खिलौनों
की
दुकाँ
जाने
नहीं
देती
Munawwar Rana
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मुद्दतों
ब'अद
मुयस्सर
हुआ
माँ
का
आँचल
मुद्दतों
ब'अद
हमें
नींद
सुहानी
आई
Iqbal Ashhar
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कमाता
हूँ
मैं
कितना
सोच
लेना
बाद
में
ये
सब
अभी
तो
बस
यही
काफ़ी
है
माँ
के
पास
रहता
हूँ
Tanoj Dadhich
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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मैदान
छोड़
देने
से
मैं
बच
तो
जाऊँगा
लेकिन
जो
ये
ख़बर
मेरी
माँ
तक
पहुँच
गई
Munawwar Rana
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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हाल
क्या
बेटियों
का
जानेंगे
वो
जो
बेटों
की
चाह
रखते
हैं
Dinesh Sen Shubh
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इतना
रखना
ख़याल
रोटी
का
रह
न
जाए
मलाल
रोटी
का
प्रश्न
सारे
सरल
हैं
दुनिया
के
सब
सेे
मुश्किल
सवाल
रोटी
का
सब
बने
फिरते
हीर
के
राँझे
कुछ
नहीं
है
कमाल
रोटी
का
काट
कर
के
उसी
को
लिखते
हैं
बस
यही
है
वबाल
रोटी
का
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Dinesh Sen Shubh
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बहाना
है
कि
रोका
था
हमीं
ने
कहो
ना
आपका
भी
मन
नहीं
था
Dinesh Sen Shubh
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फ़ैसला
ये
जो
कर
लिया
तुमने
यार
अच्छा
नहीं
किया
तुमने
आँख
से
आँख
तो
मिला
ली
पर
अब
भी
नंबर
नहीं
दिया
तुमने
मैं
अमानत
हुआ
था
कितनों
की
बाद
में
कह
दिया
पिया
तुमने
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Dinesh Sen Shubh
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ग़म
दिसंबर
की
सर्द
रातों
का
दे
रहा
ख़ूब
दर्द
रातों
का
औरतें
रोईं
तो
दिखीं
सब
को
न
दिखा
रोता
मर्द
रातों
का
जो
रहा
कल
तलक
फटा
पन्ना
हो
गया
आज
फ़र्द
रातों
का
आज
का
चाँद
हो
गया
है
वो
रंग
जिसका
था
ज़र्द
रातों
का
वो
जो
करता
ग़ुरूर
शुभ
दिन
का
वो
ही
होता
है
गर्द
रातों
का
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Dinesh Sen Shubh
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