hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Dinesh Sen Shubh
haal kya betiyon ka jaanenge
haal kya betiyon ka jaanenge | हाल क्या बेटियों का जानेंगे
- Dinesh Sen Shubh
हाल
क्या
बेटियों
का
जानेंगे
वो
जो
बेटों
की
चाह
रखते
हैं
- Dinesh Sen Shubh
Download Sher Image
तुझको
छू
कर
और
किसी
की
चाह
रखें
हैरत
है
और
लानत
ऐसे
हाथों
पर
Varun Anand
Send
Download Image
82 Likes
ज़िंदगी
में
तब
से
चाहत
की
रही
नइँ
जुस्तुजू
जब
से
हमने
आपसे
पहली
दफ़ा
की
गुफ़्तगू
Bhawna Bhatt
Send
Download Image
0 Likes
चाहत
में
मर
जाने
वाली
लड़की
हो
तुम
सचमुच
अफ़साने
वाली
लड़की
हो
आख़िरी
बैंच
पे
बैठने
वाला
लड़का
मैं
जाओ
तुम
अव्वल
आने
वाली
लड़की
हो
Read Full
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
54 Likes
ज़ख़्म
कितने
तिरी
चाहत
से
मिले
हैं
मुझ
को
सोचता
हूँ
कि
कहूँ
तुझ
से
मगर
जाने
दे
Nazeer Baaqri
Send
Download Image
47 Likes
इस
कमरे
में
लाश
पड़ी
है
चाहत
की
और
यहाँ
इक
याद
भटकती
रहती
है
Shivam Tiwari
Send
Download Image
5 Likes
उसकी
चाहत
में
भी
इख़लास
नहीं
था
शायद
और
कुछ
हम
भी
उसे
दिल
से
नहीं
चाह
सके
Salman ashhadi sahil
Send
Download Image
0 Likes
हुस्न
के
समझने
को
उम्र
चाहिए
जानाँ
दो
घड़ी
की
चाहत
में
लड़कियाँ
नहीं
खुलतीं
Parveen Shakir
Send
Download Image
47 Likes
ख़ुद
से
भी
मिल
न
सको,
इतने
पास
मत
होना
इश्क़
तो
करना,
मगर
देवदास
मत
होना
देखना,
चाहना,
फिर
माँगना,
या
खो
देना
ये
सारे
खेल
हैं,
इन
में
उदास
मत
होना
Read Full
Kumar Vishwas
Send
Download Image
118 Likes
बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
Send
Download Image
23 Likes
दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
Send
Download Image
82 Likes
Read More
फ़ैसला
ये
जो
कर
लिया
तुमने
यार
अच्छा
नहीं
किया
तुमने
आँख
से
आँख
तो
मिला
ली
पर
अब
भी
नंबर
नहीं
दिया
तुमने
मैं
अमानत
हुआ
था
कितनों
की
बाद
में
कह
दिया
पिया
तुमने
Read Full
Dinesh Sen Shubh
Download Image
0 Likes
राधिका
से
भी
कृष्ण
बिछड़े
थे
तुम
को
लगता
है
तुम
अकेले
हो
Dinesh Sen Shubh
Send
Download Image
1 Like
किसी
को
हो
गया
सोना
मुनासिब
किसी
को
जागकर
रोना
मुनासिब
है
मानो
ज़िंदगी
की
कश्मकश
में
जो
पहना
है
वही
धोना
मुनासिब
जहाँ
से
जीत
की
ख़ातिर
चले
थे
वहीं
पर
हार
कर
होना
मुनासिब
दिया
इस
साल
मेरे
रब
ने
इतना
जो
काटा
था
वही
बोना
मुनासिब
करो
ईज़ाद
अब
मिट्टी
के
ज़ेवर
सभी
को
है
कहाँ
सोना
मुनासिब
मैं
ख़ुश
रहता
हूँ
बस
ये
सोच
कर
के
वही
होगा
जो
है
होना
मुनासिब
Read Full
Dinesh Sen Shubh
Download Image
2 Likes
तमाम
रात
निकलनी
है
याद
करने
में
तमाम
दिन
हुई
थीं
कोशिशें
भुलाने
की
Dinesh Sen Shubh
Send
Download Image
1 Like
प्रेम
के
हाव-भाव
का
धागा
वो
परस्पर
लगाव
का
धागा
एक
धागा
जो
सब
से
ऊपर
है
है
बहन
के
बचाव
का
धागा
हैं
तो
धागे
बहुत
ज़माने
में
सब
सेे
प्यारा
है
भाव
का
धागा
खो
न
जाएँ
कहीं
बिना
इसके
घाट
था
में
है
नाव
का
धागा
'शुभ'
कलाई
को
देखता
है
अब
कौन
बाँधेगा
ख़ाव
का
धागा
Read Full
Dinesh Sen Shubh
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Sharm Shayari
Yaad Shayari
Irada Shayari
Budhapa Shayari
Aam Shayari