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Dinesh Sen Shubh
bahut achha hua to kya karogi
bahut achha hua to kya karogi | बहुत अच्छा हुआ तो क्या करोगी
- Dinesh Sen Shubh
बहुत
अच्छा
हुआ
तो
क्या
करोगी
ज़रा
रूठोगी
या
शिकवा
करोगी
मिरे
हालात
समझोगी
अगर
तुम
मिरी
जानाँ
मुझे
बोसा
करोगी
हवाएँ
आ
रही
हैं
ये
कहाँ
से
अकेले
में
किसे
पूछा
करोगी
अगर
होता
यक़ीं
मुझ
पर
जरा
सा
तुम्हें
लगता
था
क्या
ऐसा
करोगी
मुसाफ़िर
जा
रहा
है
हाथ
ख़ाली
अता
करना
है
या
रुस्वा
करोगी
सज़ा
होनी
है
अब
इक
बेगुनाह
को
सुनो
ऐसे
में
क्या
सज्दा
करोगी
- Dinesh Sen Shubh
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यक़ीं
कैसे
करूँँ
वादों
पे
तेरे
साथ
रहने
के
यही
वादे
किए
होंगे
उन्होंने
भी
जो
बिछड़े
हैं
Priya Dixit
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ज़ख़्म
दिल
के
भरे
नहीं
अब
तक
और
इक
दर्द
फिर
हरा
कर
लूँ
अब
भरोसा
नहीं
किसी
का
पर
तू
कहे
तो
यक़ीं
तिरा
कर
लूँ
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Harsh saxena
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यक़ीन
कर
वो
तिरे
पास
लौट
आएगा
जब
उस
का
उठने
लगेगा
यक़ीन
लोगों
से
Varun Anand
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ब-जुज़
ख़ुदा
के
किसी
का
हम
पे
करम
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
किसी
का
सजदा
जबीं
पे
अपनी
रक़म
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
हमारी
चुप्पी
ये
है
ग़नीमत
वगरना
ये
जो
किया
है
तुम
ने
यक़ीन
मानो
हमारा
माथा
गरम
नहीं
है
ये
कम
नहीं
है
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Vashu Pandey
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सो
देख
कर
तेरे
रुख़्सार-ओ-लब
यक़ीं
आया
कि
फूल
खिलते
हैं
गुलज़ार
के
अलावा
भी
Ahmad Faraz
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हैं
बाशिंदे
उसी
बस्ती
के
हम
भी
सो
ख़ुद
पर
भी
भरोसा
क्यूँ
करें
हम
Jaun Elia
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चमचमाती
कार
में
उसकी
बिदाई
हो
गई
पर
यक़ीन
आता
नहीं
है
बेवफ़ाई
हो
गई
आख़री
चोटी
से
गिरकर
हम
मरे
हैं
इश्क़
की
हम
समझते
थे
हिमालय
की
चढ़ाई
हो
गई
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Tanoj Dadhich
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यक़ीन
हो
तो
कोई
रास्ता
निकलता
है
हवा
की
ओट
भी
ले
कर
चराग़
जलता
है
Manzoor Hashmi
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कभी
ये
भी
नहीं
पूछा
है
गर्दन
पे
निशाँ
कैसा
हमें
अंधी
मोहब्बत
थी
हमें
अंधा
भरोसा
था
Shayra kirti
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बचपन
कितना
प्यारा
था
जब
दिल
को
यक़ीं
आ
जाता
था
मरते
हैं
तो
बन
जाते
हैं
आसमान
के
तारे
लोग
Azra Naqvi
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इतना
रखना
ख़याल
रोटी
का
रह
न
जाए
मलाल
रोटी
का
प्रश्न
सारे
सरल
हैं
दुनिया
के
सब
सेे
मुश्किल
सवाल
रोटी
का
सब
बने
फिरते
हीर
के
राँझे
कुछ
नहीं
है
कमाल
रोटी
का
काट
कर
के
उसी
को
लिखते
हैं
बस
यही
है
वबाल
रोटी
का
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Dinesh Sen Shubh
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कोई
आवाज़
देता
है
कहीं
से
मगर
दिखता
नहीं
है
कौन
है
वो
Dinesh Sen Shubh
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बहाना
है
कि
रोका
था
हमीं
ने
कहो
ना
आपका
भी
मन
नहीं
था
Dinesh Sen Shubh
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उस
की
नज़रों
में
ठिकाना
चाहिए
कुछ
तो
जीने
का
बहाना
चाहिए
मंज़िलें
मिलने
से
पहले
सैर
में
रास्ते
का
लुत्फ़
पाना
चाहिए
इश्क़
की
दहलीज़
से
जो
आए
हो
हादसा
कुछ
तो
बताना
चाहिए
प्यास
बुझती
है
कहाँ
पानी
से
अब
अब
छलकता
जाम
आना
चाहिए
उस
को
पाने
की
फ़क़त
चाहत
है
तो
घर
में
उसके
आना
जाना
चाहिए
आबरू
से
इश्क़
के
मतदान
में
बाप
का
साफ़ा
बचाना
चाहिए
छोड़ना
महबूब
को
पड़
जाए
तो
महफ़िलों
में
गीत
गाना
चाहिए
ग़म
कोई
ईजाद
फिर
होगा
नहीं
ग़म
को
ही
हमदम
बनाना
चाहिए
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Dinesh Sen Shubh
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आज
भी
है
याद
वो
नंबर
पुराना
यार
का
बात
वो
है
और
उस
में
फ़ोन
अब
लगता
नहीं
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Dinesh Sen Shubh
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