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Dinesh Sen Shubh
saal ye aur de gaya yaaden
saal ye aur de gaya yaaden | साल ये और दे गया यादें
- Dinesh Sen Shubh
साल
ये
और
दे
गया
यादें
दर्द
है
फिर
वही
दवा
यादें
ख़ास
कुछ
तो
हुआ
नहीं
लेकिन
हो
गईं
एक
से
सवा
यादें
साँस
लेना
भी
ना
मुनासिब
है
इश्क़
में
हो
गईं
हवा
यादें
लौट
कर
जो
वफ़ा
नहीं
आई
उसकी
आती
हैं
बे-वफ़ा
यादें
वो
तो
मेहमाँ
है
लौट
जाएगा
तुमको
आनी
हैं
बारहा
यादें
- Dinesh Sen Shubh
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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मुझे
शराब
पिलाई
गई
है
आँखों
से
मेरा
नशा
तो
हज़ारों
बरस
में
उतरेगा
Vijendra Singh Parwaaz
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डाली
है
ख़ुद
पे
ज़ुल्म
की
यूँँ
इक
मिसाल
और
उसके
बग़ैर
काट
दिया
एक
साल
और
Subhan Asad
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जाते
हुए
कमरे
की
किसी
चीज़
को
छू
दे
मैं
याद
करूँँगा
के
तेरे
हाथ
लगे
थे
Danish Naqvi
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मैं
उस
को
देख
के
चुप
था
उसी
की
शादी
में
मज़ा
तो
सारा
इसी
रस्म
के
निबाह
में
था
Muneer Niyazi
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तुम्हारे
साथ
चलने
पर
जो
दिल
राज़ी
नहीं
होता
बहुत
पहले
हम
अपना
फ़ैसला
तब्दील
कर
लेते
Saleem Kausar
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फिर
मचलने
लग
गई
हैं
उँगलियाँ
एक
ग़ज़ल
लिख
दूँ
क्या
तेरे
नाम
पर
Dev Niranjan
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इश्क़
हुआ
है
क्या
तुझ
को
भी
तेरा
जो
होगा
सो
होगा
shaan manral
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यहाँ
मज़बूत
से
मज़बूत
लोहा
टूट
जाता
है
कई
झूटे
इकट्ठे
हों
तो
सच्चा
टूट
जाता
है
Haseeb Soz
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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इश्क़
मोहब्बत
तन्हा
रातें
छोड़ो
ना
उनकी
बातें
उनकी
बातें
छोड़ो
ना
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बहाना
है
कि
रोका
था
हमीं
ने
कहो
ना
आपका
भी
मन
नहीं
था
Dinesh Sen Shubh
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तमाम
रात
निकलनी
है
याद
करने
में
तमाम
दिन
हुई
थीं
कोशिशें
भुलाने
की
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तसव्वुर
में
बिठा
कर
ले
गए
हो
उसे
अपना
बना
कर
ले
गए
हो
मुझे
आज़ाद
तो
जाना
था
करके
अगर
पिंज़रा
उठा
कर
ले
गए
हो
बड़ी
मुश्किल
में
हूँ
रहना
कहाँ
है
मिरा
घर
ही
सजा
कर
ले
गए
हो
बताओ
धड़
भला
किस
काम
का
है
वो
सर
जिसका
जुदा
कर
ले
गए
हो
शहर
में
और
भी
धन
के
घड़े
थे
मिरा
दिलबर
चुरा
कर
ले
गए
हो
किसी
की
रात
काली
कर
गए
हो
किसी
दिन
का
दिवाकर
ले
गए
हो
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Dinesh Sen Shubh
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वहीं
से
हार
कर
लौटा
मुसाफ़िर
जहाँ
से
जीत
कर
जाना
भला
था
Dinesh Sen Shubh
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