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"Dharam" Barot
ghar chhodna achha kise lagta hai yaar
ghar chhodna achha kise lagta hai yaar | घर छोड़ना अच्छा किसे लगता है यार
- "Dharam" Barot
घर
छोड़ना
अच्छा
किसे
लगता
है
यार
परदेस
में
सालों
कहा
रहना
है
यार
फिर
याद
में
निकले
कई
यूँँ
साल
थे
अब
इस
क़दर
ही
सालों
तक
जीना
है
यार
- "Dharam" Barot
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मैं
ये
भी
चाहती
हूँ
तिरा
घर
बसा
रहे
और
ये
भी
चाहती
हूँ
कि
तू
अपने
घर
न
जाए
Rehana Roohi
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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लोग
कहते
हैं
कि
इस
खेल
में
सर
जाते
हैं
इश्क़
में
इतना
ख़सारा
है
तो
घर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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दो
क़दम
का
भी
सहारा
था
बहुत
दो
क़दम
में
भी
निभाना
था
बहुत
ज़िंदगी
इस
सेे
ज़ियादा
भी
नहीं
हाँ
मगर
इस
में
तमाशा
था
बहुत
लेके
कोई
चीज़
जानी
भी
नहीं
फिर
भी
सब
को
ही
दिखाना
था
बहुत
कहता
हूँ
कोई
नहीं
मेरा
यहाँ
कहके
अपनों
से
जताना
था
बहुत
हो
न
हो
परवाह
ये
देखे
बिना
कहते
रहना
है
हमारा
था
बहुत
बोलता
अच्छा
नहीं
लगता
उन्हें
गूँगा
होकर
के
सुनाना
था
बहुत
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"Dharam" Barot
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क्यूँ
तुम्हें
कुछ
भी
छुपाना
इश्क़
में
मत
किसी
को
आज़माना
इश्क़
में
दो
की
बातों
को
रखे
दो
तक
ही
आप
क्यूँ
किसी
को
कुछ
बताना
इश्क़
में
रुक्मिणी
भी
और
राधा
भी
हो
तुम
अब
करो
कान्हा
ओ
कान्हा
इश्क़
में
रात
भर
बातों
से
वो
थकती
नहीं
अच्छा
लगता
है
जगाना
इश्क़
में
उसकी
हाँ
धोका
भी
हो
सकता
था
यार
सो
किसी
को
मत
जलाना
इश्क़
में
छोड़
कर
जाना
मुझे
सब
कल
धरम
आज
को
ही
था
मनाना
इश्क़
में
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"Dharam" Barot
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गुनाहों
का
सफ़र
चलता
रहेगा
रुकेगा
तू
मगर
चलता
रहेगा
बड़ी
बातें
करो
अच्छा
है
ये
भी
तू
उस
पर
काम
कर
चलता
रहेगा
ज़रा
सा
मोटिवेशन
चाहिएगा
तो
बच्चों
का
हुनर
चलता
रहेगा
मिलेंगे
वाह
जैसे
साथ
पैसे
सभी
शायर
का
घर
चलता
रहेगा
जो
देते
मोटिवेशन
उनको
भी
तो
ये
डिप्रेशन
का
डर
चलता
रहेगा
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रूह
तो
बस
बात
करती
है
तुम्हारी
बात
करते
हो
ख़ुदा
की
मर्ज़ी
की
क्यूँ
"Dharam" Barot
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परायों
पर
कभी
भी
वार
कर
पाते
नहीं
जो
लोग
बनाकर
गोडसे
अपनों
को
ही
हैं
मारते
वो
लोग
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