kyuuñ tumhein kuchh bhi chhupaana ishq men | क्यूँ तुम्हें कुछ भी छुपाना इश्क़ में

  - "Dharam" Barot
क्यूँतुम्हेंकुछभीछुपानाइश्क़में
मतकिसीकोआज़मानाइश्क़में
दोकीबातोंकोरखेदोतकहीआप
क्यूँकिसीकोकुछबतानाइश्क़में
रुक्मिणीभीऔरराधाभीहोतुम
अबकरोकान्हाकान्हाइश्क़में
रातभरबातोंसेवोथकतीनहीं
अच्छालगताहैजगानाइश्क़में
उसकीहाँधोकाभीहोसकताथायार
सोकिसीकोमतजलानाइश्क़में
छोड़करजानामुझेसबकलधरम
आजकोहीथामनानाइश्क़में
  - "Dharam" Barot
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