hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
"Dharam" Barot
camp faayar ka bhi apna ik maza hai
camp faayar ka bhi apna ik maza hai | कैम्प फ़ायर का भी अपना इक मज़ा है
- "Dharam" Barot
कैम्प
फ़ायर
का
भी
अपना
इक
मज़ा
है
छूटे
जंगल
में
जो
चिंगारी
सज़ा
है
- "Dharam" Barot
Download Sher Image
मैं
बाग़
में
जिस
जगह
खड़ा
हूँ
हर
फूल
से
काम
चल
रहा
है
Shaheen Abbas
Send
Download Image
25 Likes
यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
Read Full
Faiz Ahmad Faiz
Send
Download Image
34 Likes
ईद
पर
सब
फूल
लेकर
आ
रहे
हैं
हो
गए
हैं
ज़िंदगी
के
ख़त्म
रमज़ान
Aves Sayyad
Send
Download Image
3 Likes
जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
Read Full
Dushyant Kumar
Send
Download Image
33 Likes
लम्स
उसका
इस
क़दर
महसूस
होता
है
मुझे
हो
कोई
नाराज़
तितली
फूल
पर
बैठी
हुई
फ़िल्म
में
शायद
बिछड़ने
का
कोई
अब
सीन
है
और
मेरे
हाथ
को
वो
थाम
कर
बैठी
हुई
Read Full
Sunny Seher
Send
Download Image
5 Likes
वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
Send
Download Image
42 Likes
मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
Send
Download Image
31 Likes
मत
पूछो
कितना
ग़मगीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
ज़्यादा
तुमको
याद
नहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
अमरोहे
में
बान
नदी
के
पास
जो
लड़का
रहता
था
अब
वो
कहाँ
है
मैं
तो
वहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
Read Full
Jaun Elia
Send
Download Image
95 Likes
दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
Read Full
Kafeel Rana
Send
Download Image
43 Likes
बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
Send
Download Image
42 Likes
Read More
सभी
औरत
को
होता
शौक़
ज़ेवर
का
पढ़ाया
बच्चा
छोड़ा
शौक़
ज़ेवर
का
कमाया
बच्चा
माँ
ने
माँगे
थे
कंगन
लगा
बेटे
को
कैसा
शौक़
ज़ेवर
का
बढ़ा
था
ख़र्च
पोता
अब
पढ़े
कैसे
तभी
फिर
काम
आया
शौक़
ज़ेवर
का
दिखावा
या
ज़रूरत
कौन
ये
समझे
ये
किसके
वास्ते
था
शौक़
ज़ेवर
का
Read Full
"Dharam" Barot
Download Image
2 Likes
गुज़ारी
जाए
ऐसी
ज़िंदगी
कान्हा
करूँँ
बस
मैं
तेरी
ही
बंदगी
कान्हा
"Dharam" Barot
Send
Download Image
1 Like
सोच
कर
ही
मुझको
रोना
आता
था
कह
दिया
आसानी
से
सब
धोखा
था
दोस्त
इस
पर
और
कसते
तंज
ये
यार
कितनी
बार
तुझको
रोका
था
रोकने
से
कौन
रुकता
इश्क़
में
दो
की
मर्ज़ी
से
मुक़म्मल
होना
था
सोच
ये
परदेश
में
आती
ही
है
बूढ़ा
होकर
जल्दी
से
घर
जाना
था
गिन
रहा
हूँ
आख़िरी
साँसें
सनम
आपको
भी
देर
से
ही
आना
था
रंज
माँ
को
रह
ही
जाएगा
'धरम'
ख़ुद-कुशी
बेटे
की
सब
कुछ
खोना
था
Read Full
"Dharam" Barot
Download Image
1 Like
सबने
उसे
हर
पल
बताया
था
ख़राब
ये
इश्क़
में
उसके
सिवा
लगता
ख़राब
बस
इश्क़
में
पागल
हुई
है
वो
मेरे
कोई
न
कोई
इश्क़
में
होता
ख़राब
पहले
इबादत
करनी
उसकी
इश्क़
में
कहना
ग़लत
फिर
उस
में
था
क्या
क्या
ख़राब
ये
दोगलेपन
का
सहारा
अच्छा
हैं
मर्ज़ी
से
हो
जाता
हूँ
अच्छा
या
ख़राब
यानी
नहीं
है
दोगलापन
ये
कहा
अच्छा
भी
होता
है
धरम
थोड़ा
ख़राब
Read Full
"Dharam" Barot
Download Image
1 Like
अजनबी
से
शहर
को
अपना
बनाया
ये
ज़रूरत
नाम
पर
क्या
क्या
बनाया
गाँव
का
घर
स्वर्ग
समझा
देर
से
मैं
फ़ार्म
हाउस
नाम
का
सपना
बनाया
टूटे
दिल
को
टूटा
ही
रहने
दे
जी
आप
दिल
दे
दे
कर
घाव
को
गहरा
बनाया
खेल
को
इक
रात
का
कैसे
समझता
बूँद
से
जिसने
समुंदर
था
बनाया
हाल-ए-दिल
जाना
धरम
का
और
उसने
जाल-ए-दिल
का
रास्ता
पक्का
बनाया
Read Full
"Dharam" Barot
Download Image
2 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Aazaadi Shayari
Terrorism Shayari
I love you Shayari
Jawani Shayari
Anjam Shayari