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"Dharam" Barot
soch kar hi mujhko rona aata tha
soch kar hi mujhko rona aata tha | सोच कर ही मुझको रोना आता था
- "Dharam" Barot
सोच
कर
ही
मुझको
रोना
आता
था
कह
दिया
आसानी
से
सब
धोखा
था
दोस्त
इस
पर
और
कसते
तंज
ये
यार
कितनी
बार
तुझको
रोका
था
रोकने
से
कौन
रुकता
इश्क़
में
दो
की
मर्ज़ी
से
मुक़म्मल
होना
था
सोच
ये
परदेश
में
आती
ही
है
बूढ़ा
होकर
जल्दी
से
घर
जाना
था
गिन
रहा
हूँ
आख़िरी
साँसें
सनम
आपको
भी
देर
से
ही
आना
था
रंज
माँ
को
रह
ही
जाएगा
'धरम'
ख़ुद-कुशी
बेटे
की
सब
कुछ
खोना
था
- "Dharam" Barot
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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इश्क़
जिसको
सभी
समझते
हैं
वहम
है
लज़्ज़त-ए-रसाई
का
Kaif Uddin Khan
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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इश्क़
तू
ने
बड़ा
नुक़सान
किया
है
मेरा
मैं
तो
उस
शख़्स
से
नफ़रत
भी
नहीं
कर
सकता
Liaqat Jafri
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दिल
से
निकलेगी
न
मर
कर
भी
वतन
की
उल्फ़त
मेरी
मिट्टी
से
भी
ख़ुशबू-ए-वफ़ा
आएगी
Lal Chand Falak
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रास्ता
जब
इश्क़
का
मौजूद
है
फिर
किसी
की
क्यूँँ
इबादत
कीजिए?
ख़ुद-कुशी
करना
बहुत
आसान
है
कुछ
बड़ा
करने
की
हिम्मत
कीजिए
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Bhaskar Shukla
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दुकानें
नफ़रतों
की
ख़ूब
आसानी
से
चलती
हैं
अजब
दुनिया
है
जाने
इश्क़
क्यूँ
करने
नहीं
देती
Bhaskar Shukla
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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बिना
इस
इश्क़
के
कैसे
गुज़ारा
हो
ज़रूरी
है
कि
हो
ये
इश्क़
दोबारा
Abhay Aadiv
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नई
दुनिया
बनाऊँगा
मगर
मैं
अपनी
दुनिया
का
ख़ुदा
भी
इश्क़
में
खोया
हुआ
लड़का
बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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कोरे
काग़ज़
को
रखें
कोरा
ही
आप
नाम
स्याही
बिन
लिखें
मोरा
ही
आप
"Dharam" Barot
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इसी
हाल
में
रहने
देना
था
मुझको
ये
अश्कों
में
बस
बहने
देना
था
मुझको
सुना
ग़ौर
से
मैने
तब
आपको
भी
मेरी
बात
को
कहने
देना
था
मुझको
उठाकर
गिराने
से
अच्छा
जहाँ
था
वही
पर
पड़ा
रहने
देना
था
मुझको
सुना
आपका
क्यूँ
न
सोचा
ज़रा
सा
मेरे
घर
में
तो
सहने
देना
था
मुझको
कभी
कोई
क़ीमत
न
मेरी
लगाए
इसी
रूप
में
बहने
देना
था
मुझको
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"Dharam" Barot
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साथ
होता
ही
नहीं
सब
का
यहाँ
हौसला
ही
साथ
होता
था
मेरा
"Dharam" Barot
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मैं
नेता
सैलरी
भी
दान
कर
देता
लिए
बिन
सैलरी
घर
अपना
भर
देता
मेरा
क्या
है
हूँ
मैं
इक
आम
सा
इंसान
मुझे
इन
सब
से
क्या
मैं
सिर्फ़
कर
देता
दिए
मैंने
थे
जितनी
बार
जाकर
वोट
नया
क्या
धरम
या
फिर
जात
पर
देता
तुझे
बदलाव
लाना
है
मगर
तू
भी
इमोशन
से
धरम
सच
झूठ
कर
देता
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सँवारेगा
तुम्हारा
दिल
ये
पत्थर
दिल
मोहब्बत
मॉम
का
कर
देती
है
हर
दिल
किसीने
गर
जलाया
मॉम
के
दिल
को
हो
जाता
और
ही
ढाँचे
का
जलकर
दिल
ज़ियादा
ज्ञान
भी
अच्छा
नहीं
होता
कभी
ये
मत
सिखाए
अक़्ल
से
भर
दिल
भरोसा
ठीक
से
ये
भी
दिलाया
था
मुझे
लगने
लगा
सच
में
है
ये
घर
दिल
नहीं
रिश्ता
जुदाई
का
कफ़न
तक
ये
बदन
को
छोड़
कर
फिर
तू
सफ़र
कर
दिल
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