soch kar hi mujhko rona aata tha | सोच कर ही मुझको रोना आता था

  - "Dharam" Barot
सोचकरहीमुझकोरोनाआताथा
कहदियाआसानीसेसबधोखाथा
दोस्तइसपरऔरकसतेतंजये
यारकितनीबारतुझकोरोकाथा
रोकनेसेकौनरुकताइश्क़में
दोकीमर्ज़ीसेमुक़म्मलहोनाथा
सोचयेपरदेशमेंआतीहीहै
बूढ़ाहोकरजल्दीसेघरजानाथा
गिनरहाहूँआख़िरीसाँसेंसनम
आपकोभीदेरसेहीआनाथा
रंजमाँकोरहहीजाएगा'धरम'
ख़ुद-कुशीबेटेकीसबकुछखोनाथा
  - "Dharam" Barot
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